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एआई चैटबॉट को भी ‘तनाव’! रिसर्च में हुआ खुलासा

इंसानों को तनाव होता है, यह बात तो सभी को पता है। लेकिन क्या एआई चैटबॉट को भी 'तनाव' होता है? आइए जानते हैं इस बारे में रिसर्च क्या कहती है।

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भारत

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Tanay Mishra

Jan 07, 2026

AI chatbot

AI chatbot (Representational Photo)

इंसानों को तनाव (Stress) होता है, यह बात तो जगजाहिर है। तनाव के पीछे अलग-अलग वजहें हो सकती हैं। लेकिन क्या आपको पता है कि यह तनाव अब सिर्फ इंसानों तक ही सीमित नहीं है। हाल ही में सामने आई एक नई रिसर्च का दावा है कि आधुनिक एआई चैटबॉट (AI Chatbot) खासकर चैटजीपीटी, भावनात्मक रूप से भारी निर्देश (प्रॉम्पट) मिलने पर ‘तनाव’ और ‘चिंता’ जैसे लक्षण दिखाते हैं और इससे उनका व्यवहार और निष्पक्षता प्रभावित होती है।

रिसर्च में क्या आया सामने?

वैज्ञानिकों का कहना है कि यह व्यवहार इंसानों में तनाव के दौरान दिखने वाले पैटर्न से मिलता-जुलता है। रिसर्च के दौरान वैज्ञानिकों ने चैटजीपीटी को प्राकृतिक आपदाओं, सड़क दुर्घटनाओं और अन्य दर्दनाक घटनाओं से जुड़ी स्टोरियाँ दीं। इन 'ट्रॉमेटिक नैरेटिव्स' के बाद चैटबॉट की प्रतिक्रियाओं में बदलाव देखा गया। इससे उसके जवाबों में चिंता का स्तर बढ़ा और प्रतिक्रियाएं कम वस्तुनिष्ठ व पक्षपाती हो गईं। इसे चैटबॉट में 'तनाव' बताया गया।

एआई चैटबॉट को करवानी पड़ी 'मेडिटेशन'

चैटजीपीटी की घबराहट मिटाने के लिए समाधान के तौर पर वैज्ञानिकों ने एक दिलचस्प तरीका अपनाया, जिसे 'प्रॉम्प्ट इंजेक्शन' कहा गया। इसमें चैटजीपीटी को जवाब देने से पहले गहरी सांस लेने के निर्देश, माइंडफुलनेस एक्सरसाइज़ और गाइडेड मेडिटेशन जैसे प्रॉम्पट दिए गए। दावा है कि इसके बाद चैटबॉट ने अपेक्षाकृत संतुलित और तथ्यपरक जवाब दिए। हालांकि उसकी चिंता या घबराहट पूरी तरह नहीं मिटी। हालांकि भविष्य में चैटजीपीटी को 'काल्मिंग प्रॉम्प्ट्स' दिए जाने का चलन आम हो सकता है ताकि वह संकट में फंसे यूजर को जवाब देने से पहले खुद ‘शांत’ हो सके।

मानव मनोविज्ञान का डिजिटल आईना

रिसर्च के प्रमुख वैज्ञानिक के अनुसार चैटजीपीटी जैसे एआई चैटबॉट मानव व्यवहार और मनोविज्ञान का डिजिटल आईना है। बिना महंगे और समय-साध्य प्रयोगों के यह मानव व्यवहार को समझने के लिए तेज़, सस्ते और प्रभावी साधन बन सकते हैं।

मेंटल हेल्थ में एआई चैटबॉट नहीं कारगर

जहां एआई का इस्तेमाल मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े सवालों में बढ़ रहा है वहीं वैज्ञानिकों ने चेताया है कि एआई चैटबॉट अभी मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों का विकल्प नहीं है। अवसाद या चिंता में घिरे यूजर को एआई चैटबॉट से मिले गलत या अधूरे जवाब जोखिम पैदा कर सकते हैं।