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टाइप-2 डायबिटीज़ बदल रही दिल की बनावट, हार्ट अटैक का खतरा बढ़ा!

New Discovery: टाइप-2 डायबिटीज़ के बारे में वैज्ञानिकों ने एक बड़ी खोज की है। इस खुलासे से लोगों की चिंता बढ़ सकती है। क्या कहती है यह खोज? आइए जानते हैं।

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भारत

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Tanay Mishra

Jan 06, 2026

Heart structure

Heart structure (Representational Photo)

टाइप-2 डायबिटीज़ (Type-2 Diabetes) ब्लड शुगर बढ़ाने वाली एक बीमारी है। हालांकि इस बीमारी से सिर्फ शरीर का ब्लड शुगर लेवल ही नहीं बढ़ता, बल्कि दिल पास भी असर पड़ता है। जी हाँ, आपने सही पढ़ा। टाइप-2 डायबिटीज़ चुपचाप दिल की बनावट और उसकी ऊर्जा बनाने की प्रक्रिया को भी बदल देती है। यही कारण है कि टाइप-2 डायबिटीज़ से पीड़ित लोगों में हार्ट अटैक का खतरा भी बढ़ जाता है।

क्या कहती है रिसर्च?

ऑस्ट्रेलिया की यूनिवर्सिटी ऑफ सिडनी के वैज्ञानिकों ने रिसर्च में टाइप-2 डायबिटीज़ के बारे में यह पता लगाया है। वैज्ञानिकों ने मेडिकल रिसर्च के लिए दान किए गए दिलों पर स्टडी की। उन्होंने पाया कि टाइप-2 डायबिटीज़ दिल की कोशिकाओं में ऊर्जा उत्पादन की प्रक्रिया को बाधित करती है, मांसपेशियों की संरचना को कमजोर बनाती है और इस वजह से दिल में सख्त, रेशेदार टिश्यू जमा होने लगते हैं। इससे खून को प्रभावी ढंग से पंप करना मुश्किल हो जाता है।

दिल की कोशिकाओं पर असर

टाइप-2 डायबिटीज़ से हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है। स्वस्थ दिल अपनी ज़्यादातर ऊर्जा फैट से प्राप्त करता है। ग्लूकोज़ और कीटोन्स भी इसमें योगदान देते हैं। हार्ट फेलियर की स्थिति में ग्लूकोज़ का उपयोग बढ़ जाता है, लेकिन टाइप-2 डायबिटीज़ दिल की कोशिकाओं की इंसुलिन के प्रति संवेदनशीलता को कम कर देती है, जिससे यह संतुलन बिगड़ जाता है।

पहली बार असल इंसानी दिल की ऐसी जांच

रिसर्च के प्रमुख वैज्ञानिक ने बताया कि वह लंबे समय से जानते थे कि दिल की बीमारी और टाइप-2 डायबिटीज़ के बीच गहरा कनेक्शन है, लेकिन यह पहली स्टडी के जिसमें इसका खुलासा हुआ है। डायबिटीज़ की वजह से दिल सिकुडकर खून पंप करता है। इस रिसर्च में पहली बार असल इंसानी दिल के टिश्यू का की स्टडी की गई। वैज्ञानिकों ने हार्ट ट्रांसप्लांट करा चुके मरीजों और स्वस्थ व्यक्तियों के दिलों के टिश्यू की भी तुलना की।