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अब रोबोट्स को भी होगा दर्द का अहसास, वैज्ञानिकों ने की नई खोज

New Discovery: वैज्ञानिकों ने अब ऐसी खोज की है जिससे रोबोट्स को भी दर्द का अहसास होगा। कैसे? आइए जानते हैं।

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भारत

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Tanay Mishra

Jan 06, 2026

Robots will feel pain

Robots will feel pain (Representational Photo)

अब तक हमने फिल्मों में ऐसे रोबोट देखे थे जो इंसानों की तरह लगते हैं और महसूस कर सकते है, लेकिन अब यह हकीकत बनने जा रही है। सिटी यूनिवर्सिटी ऑफ हॉन्गकॉन्ग के वैज्ञानिकों ने एक ऐसी आर्टिफिशियल ई-स्किन विकसित की है, जो रोबोट्स को न सिर्फ स्पर्श का अहसास कराएगी, बल्कि दर्द महसूस होने पर रोबोट्स की प्रतिक्रिया भी दिखेगी।

वैज्ञानिकों की नई खोज

जिस तरह हमारा हाथ किसी गर्म चीज को छूते ही बिना सोचे-समझे पीछे हट जाता है, ठीक वैसी ही क्षमता अब रोबोट्स में होगी। वैज्ञानिकों ने एक नई खोज की है जिसके अनुसार यह नई त्वचा 'न्यूरोमॉर्फिक' प्रणाली पर आधारित है, जो मानव तंत्रिका तंत्र की नकल करती है। आमतौर पर रोबोट्स को कुछ भी करने के लिए अपने मुख्य कंप्यूटर (ब्रेन) से निर्देश मिलने का इंतज़ार करना पड़ता है, जिसमें समय लगता है। लेकिन नई खोज से त्वचा में लगे सेंसर दर्द या खतरे को पहचानते ही स्थानीय स्तर पर 'रिफ्लेक्स' पैदा करेंगे।

क्यों ज़रूरी है यह खोज?

वाइयाँएको का कहना है कि भविष्य में जब ह्यूमनॉइड रोबोट्स घरों और अस्पतालों में इंसानों के साथ काम करेंगे, तो उनके लिए यह तकनीक सुरक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण होगी। नई ई-स्किन की खासियत यह है कि हल्के से स्पर्श और तेज़ चोट के बीच अंतर कर सकती है। अगर त्वचा का कोई हिस्सा डैमेज होता है, तो रोबोट्स को तत्काल पता चल जाएगा। चूंकि यह मॉड्यूलर है, इसलिए खराब हुए हिस्से को किसी पुर्जे की तरह आसानी से बदला जा सकता है।

पुरानी तकनीक से कैसे अलग?

वर्तमान में ज़्यादातर रोबोट्स में या तो स्पर्श की समझ नहीं होती, या वो सिर्फ साधारण दबाव महसूस कर सकते हैं। ऐसे में वो खुद को होने वाले नुकसान को नहीं पहचान पाते। अब वो त्वचा के ज़रिए ऐसे खतरे भांप लेगा।