नवरात्रि: हर दुःख को दूर करती हैं ये देवी मां! न्याय के लिए विराजी हैं 1000 फीट ऊंचे पर्वत पर...

devi shakti peeth salkanpur : जानें कैसे पहुंचना है देवी मां के दरबार और क्या है यहां की खासियत

सीहोर। इन दिनों शारदीय नवरात्रि ( navratri ) का समय चल रहा है। ऐसे में मध्य प्रदेश सहित देश में कई जगह भक्त माता दुर्गा के नौ रूपों की पूजा करने विभिन्न मंदिरों में जाते हैं।

वहीं इस दौरान माता के शक्तिपीठ के दर्शन अत्यधिक खास माना जाता है। ऐसे में आज हम आपको एक ऐसी शक्ति पीठ ( devi shakti peeth salkanpur) के बारे में बता रहे हैं। जो कुछ साल पहले तक लोगों की नजरों से काफी हद तक छिपा हुआ था, लेकिन आज यहां लाखों की संख्या में श्रद्धालु आते हैं और माता से आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।

वहीं इस माता मंदिर ( salkanpur temple )की खासियत के अनुसार माना जाता है कि देवी मां यहां सच्चे दिल से आने वाले हर भक्त का हर दूख दूर कर देती हैं।

दरअसल मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से सटे जिले सीहोर में सलकनपुर नामक एक गांव है। यहां स्थित 1000 फीट ऊंची पहाड़ी पर विराजमान है बिजासन देवी जिन्हें सलकनपुर माता के नाम से भी जाना जाता है।

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नवरात्रि: हर दुःख को दूर करती हैं ये देवी मां! न्याय के लिए विराजी हैं 1000 फीट ऊंचे पर्वत पर...

यह देवी मां दुर्गा का अवतार मानी जाती हैं। देवी मां का यह मंदिर MP की राजधानी भोपाल से 75 किमी दूर है। वहीं यह पहाड़ी मां नर्मदा से 15 किलोमीटर दूर स्थित है।

करीब 50 साल पहले ऐसा दिखता था ये देवी मंदिर
आज भले ही इस मंदिर में लाखों की संख्या में श्रद्धालु आते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं। करीब 50 साल पहले (1970 में) नवरात्र में पूरे 9 दिन में करीब 5 हजार श्रद्धालु आते थे। उस समय यहां एक दिन में अधिकतम 500 श्रद्धालु आते थे। मंदिर छोटी मढ़िया थी। सीढ़ियां नहीं थी। ऐसे में श्रद्धालु पत्थरों का पकड़कर ऊपर जाते थे। यहां तक की पीने का पानी तक कुएं से लाना पड़ता था।

सिद्ध शक्तिपीठ ( shakti peeth salkanpur ) में है शामिल....
सलकनपुर का मां विजयासन धाम प्रसिद्ध शक्तिपीठों में शामिल है। इसकी स्थापना का समय स्पष्ट रूप से नहीं पता लेकिन इतना ज्ञात है कि इस मंदिर का निर्माण 1100 ई. के करीब गौंड राजाओं द्वारा किला गिन्नौरगढ़ निर्माण के दौरान करवाया गया था।

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नवरात्रि: हर दुःख को दूर करती हैं ये देवी मां! न्याय के लिए विराजी हैं 1000 फीट ऊंचे पर्वत पर...

प्रसिद्ध संत भद्रानंद स्वामी ने मां विजयासन धाम में कठोर तपस्या की। उन्होंने नल योगिनियों की स्थापना कर क्षेत्र को सिद्ध शक्तिपीठ बनाया था। लाखों भक्त इस तपस्या स्थली पर पहुंचते हैं और मन्नत मांगते हैं।

ये हैं हर दुःख दूर करने वाली माता...
मां बिजासन के दरबार में दर्शनार्थियों की कोई पुकार कभी खाली नहीं जाती है। बड़े से बड़ा मंत्री हो या एक गरीब इंसान मां सब पर कृपा बरसाती हैं। भक्तों के बढ़ते हुए कदम जैसे ही इस धाम की परिधि पर पहुंचते हैं, पूरा शरीर मानो मां बिजासन की शक्ति से भर जाता है।

माना जाता है कि मां विजयासन देवी पहाड़ पर अपने परम दिव्य रूप में विराजमान हैं। विध्यांचल पर्वत श्रंखला पर विराजी माता को विध्यवासिनी देवी भी कहा जाता है। वहीं यह भी मान्यता है कि देवी मां यहां आने वाली सभी भक्तों का दुख दूर कर देती हैं।

माता पार्वती का अवतार हैं विजयासन देवी!
पुराणों के अनुसार देवी विजयासन माता पार्वती का ही अवतार हैं, जिन्होंने देवताओं के आग्रह पर रक्तबीज नामक राक्षस का वध किया था और सृष्टि की रक्षा की थी।

विजयासन देवी को कई लोग कुलदेवी के रूप में भी पूजते हैं। माता कन्याओं को मनचाहा जीवनसाथी का आशीर्वाद देती हैं, वहीं भक्तों की सूनी गोद भी भरती हैं। भक्तों की ही श्रद्धा है कि इस देवीधाम का महत्व किसी शक्तिपीठ से कम नहीं हैं।

1400 सीढ़ियों का रास्ता...
इस मंदिर पर पहुंचने के लिए भक्तों को 1400 सीढ़ियों का रास्ता पार करना पड़ता है। जबकि इस पहाड़ी पर जाने के लिए कुछ वर्षों में सड़क मार्ग भी बना दिया गया है।

यहां पर दो पहिया और चार पहिया वाहन से पहुंचा जा सकता है। यह रास्ता करीब साढ़े 4 किलोमीटर लंबा है। इसके अलावा दर्शनार्थियों के लिए रोप-वे भी शुरू हो गया है, जिसकी मदद से यहां 5 मिनट में पहुंचा जा सकता है।

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मंदिर की खासियत: जानकर रह जाएंगे हैरान...
कहा जाता है कि राक्षस रक्तबीज के वध के बाद माता जिस स्थान पर बैठी थीं, उसी स्थान को विजयासन के रूप में जाना जाता है। इसी पहाड़ी पर सैकड़ों जगहों पर रक्तबीज से युद्ध के अवशेष नजर आते हैं।

नवरात्र में इस स्थान पर लाखों श्रद्धालु मन्नत पूरी होने पर चढ़ावा-चढ़ाने, जमाल चोटी उतारने और तुलादान कराने पहुंचते हैं। परिसर सर्वसुविधायुक्त है।

वास्तुकला : दक्षिणमुखी पाषाण मूर्ति है। मूर्ति के सामने भैरव जी स्थापित हैं। वहीं मंदिर से कुछ दूरी पर करीब 18 से 20 फीट की गहराई पर एक शिव मंदिर भी बताया जाता है।

यहां है स्थित: जिला मुख्यालय सीहोर से 80 किमी दूर रेहटी तहसील में।

बाघ करता है माता की परिक्रमा
बताया जाता है कि नजदीकी रातापानी के जंगलों से बाघ भी माता के मंदिर तक पहुंच जाता है। भक्तों मानते हैं कि मां दुर्गा का यह वाहन माता के दर्शन करने के लिए मंदिर के आसपास तक पहुंच जाता है।

कुछ ग्रामीण बताते हैं कि कई बरसों पहले जब यहां मंदिर का निर्माण नहीं हुआ था तो बाघ मंदिर के आसपास ही रहता था। धीरे-धीरे भक्तों की श्रद्धा उमड़ी और आज विजयासन देवी धाम बड़ा तीर्थ बन गया है।

स्वयं-भू है माता की प्रतिमा
मां विजयासन देवी की प्रतिमा स्वयं-भू है। यह प्रतिमा माता पार्वती की है, जो वात्सल्य भाव से अपनी गोद में भगवान गणेश को लेकर बैठी हुई है। इस भव्य मंदिर में महालक्ष्मी, महासरस्वती और भगवान भैरव की प्रतिमाएं भी स्थापित हैं। भक्त कहते हैं कि एक मंदिर में कई देवी-देवताओं का आशीर्वाद पाने का सभी को सौभाग्य मिल जाता है।


ऐसे पहुंचे देवी मां के दरबार:
रेल मार्ग से यह मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल से 75 किमी की दूरी पर है। वहीं होशंगाबाद से 40 किमी की दूरी पर, इसके अलावा इंदौर से 180 किमी और सीहोर से 90 किमी की दूरी पर बस द्वारा मां विजयासन धाम पहुंचा जा सकता है।

जबकि अपना वाहन होने पर भोपाल से व्हाया औबेदुल्लागंज इसकी दूरी 75 किमी है। वहीं भोपाल से व्हाया कोलार डैम इसकी दूरी 65 किमी है।

इसके साथ ही पहाड़ी पर स्थित सलकनपुर मंदिर तक पहुंचने के लिए सीड़ी मार्ग, रोप वे और सड़क मार्ग भी मौजूद हैं।

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दीपेश तिवारी
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