खाद लेने गए एक किसान की मौत हो जाने से हडक़ंप मच गया है.
सीहोर. खाद लेने गए एक किसान की मौत हो जाने से हडक़ंप मच गया है, बेटे का कहना है कि पिताजी खाद के लिए लाइन में लगे थे, ऐसे में काफी देर से लाइन में खड़े होने के कारण वे अचानक गिरे और उनकी मौत हो गई, वहीं सोसायटी प्रबंधन का कहना है कि किसान की मौत सोसायटी से गोदाम जाते समय रास्ते में हुई है।
जिले की ढाबला सेवा सहकारी समिति (सोसायटी) में यूरिया खाद लेने गए एक किसान की मौत हो गई। किसान के बेटे ने आरोप लगाया है कि पिता खाद लेने काफी देर से लाइन में लगे थे, उसी समय अचानक गिरे और मौत हो गई।
इधर, सोसायटी प्रबंधन ने इस आरोप को नकार रहा है। सोसाइटी का तर्क है कि किसान की मौत सोसायटी से गोदाम जाते समय रास्ते में मौत हुई है। किसान की मौत रास्ते में हुई या सोयाइटी कार्यालय में, लेकिन बेटे ने अपने पिता को खो दिया। और इस बात से यह भी स्पष्ट हो गया कि जिले में यूरिया का संकट कम होने के बजाय बढ़ता जा रहा है और अफसर सिर्फ खोखले दाव कर रहे हैं। जानकारी के अनुसार, रामाखेड़ी निवासी किसान शिवनारायण मेवाड़ा ढाबला सोसायटी में पर खाद लेने पहुंचा था। किसान के बेटे माखन सिंह ने आरोप लगाया है कि पिता सुबह से दोपहर तक भूखे, प्यासे खाद लेने लाइन में लगे थे, तभी अचानक जमीन पर गिरे और मौत हो गई। यदि समय पर खाद मिलता तो शायद ऐसी स्थिति नहीं बनती। जिले में यूरिया खाद का काफी संकट है, किसानों को समय पर पर्याप्त यूरिया नहीं मिल रहा है, बाजार में कालाबाजारी हो रही है। 266 रुपए की बोरी का किसानों से 400 रुपए तक वसूला जा रहा है, जिसके चक्कर में किसान सोयाइटी से खाद लेने को प्राथमिकता दे रहे हैं, लेकिन सोसाइटियों पर लंबी-लंबी लाइन में लगने के बाद भी खाद नहीं मिल रहा है। इसी गफलत में एक किसान की मौत हो गई।
जिले में जारी है खाद संकट
जिले में कृषि विभाग ने 75 हजार मीट्रिक टन यूरिया खाद की डिमांड भेजी है, जिसमें अभी तक महज 27 हजार मीट्रिक टन खाद आया है।यह खाद सोसायटी सहित प्राइवेट सेक्टर की दुकानों को उपलब्ध करा दिया है। आलम यह हैकि खाद की कमी के चलते हर दिन सोसायटियों में किसानों की लंबी लाइन देखी जा रही है। किसानों को दो बोरी यूरिया के लिए घंटों परेशान होना पड़ रहा है। इसके बाद भी खाद मिलेगा या नहीं उसकी कोई गारंटी नहीं रहती है।
सोसायटी से 500 मीटर दूर है गोदाम
इधर, सोसायटी प्रबंधन ने तर्क दिया है कि किसान शिवनारायण दोपहर तीन बजे के करीब सोसायटी में आया था, तब कोई भीड़ और न ही कोई लाइन लगी हुई थी। सोसायटी से चार बोरी यूरिया खाद की पर्ची बनाकर 500 मीटर दूर गोडाउन में खाद लेने भेज दिया था। किसान सोसायटी से गोडाउन जाने के लिए निकले थे, तभी रास्ते में मौत हुई है। किसान का परिवार जो आरोप लगा रहा है, वह सत्य नहीं हैं। किसान की मौत सोयाइटी कार्यालय पर नहीं, बल्कि रास्ते में हुई है।
किसान शिवनारायण मेवाड़ा दोपहर तीन बजे सोसायटी आया था, उस समय कोई भीड़ नहीं थी और न ही लाइन लगी थी। किसान को चार बोरी यूरिया की पर्चीबनाकर दी गई और गोडाउन से ले जाने का कहा था। किसान सोसायटी से गोडाउन जा रहा था, तभी रास्ते में मौत हुई।परिजन जो आरोप लगा रहे हैं वह पूरी तरह से निराधार है।
-शंकरलाल सेन, प्रबंधक सेवा सहकारी समिति ढाबला