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फसल बेचकर दो महीने से भटक रहा किसान, जिम्मेदारों ने किसी और के खाते में डाल दी रकम

फसल बिक गई पर दूसरे के खाते में चला गया पैसा, अब इंसाफ के लिए दो महीनों से दर-दर भटक रहा किसान।

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फसल बेचकर दो महीने से भटक रहा किसान, जिम्मेदारों ने किसी और के खाते में डाल दी रकम

मध्य प्रदेश के सीहोर जिले में सिस्टम की लापरवाही का खामियाजा एक किसान को भुगतना पड़ रहा है। किसान को उसकी ही मेहनत के पैसों के लिए दर-दर भटकना पड़ रहा है। पीड़ित किसान न्याय की आस में पिछले दो महीनों से अलग अलग दफ्तरों के चक्कर काट रहा है, लेकिन अबतक उसकी कहीं कोई सुनवाई नहीं हो सकी है।

बताया जा रहा है कि, सिस्टम की लापरवाही का खामियाजा जिले के अंतर्गत आने वाले ग्राम खुलास के रहने वाले किसान जीवन सिंह को भुगतना पड़ रहा है। अपने बच्चों के साथ परिवार के कई सदस्यों का भरण-पोषण करने के लिए जीवन सिंह ने बड़े ही उम्मीद से अपने कृषि भूमि में गेहूं की फसल उगाई, खेतों में लहलहाती फसल को देखकर किसान और उसका परिवार काफी खुश था। इस बार फसल की पैदावार अच्छी देखकर किसान ने बड़ी उम्मीद लगाई थी, कि इस बार हुई फसल के दाम मिलने से सारा कर्जा उतर जाएगा और साथ ही बच्चों और परिवार के सदस्यों की भी कई जरूरतों को पूरा कर सकूंगा। इसी आस के साथ अपनी फसल बेचने किसान गेहूं उपार्जन केंद्र पहुंचा, जहां उसने अपना 50 क्विंटल गेहूं उपार्जन केंद्र को बेच भी दिया।

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क्या है मामला ?

लेकिन, किसान की उम्मीदों पर उस समय पानी फिर गया, जब उसे पता चला कि, उसकी फसल के एवज में उपार्जन केंद्र से मिले 72 हजार रुपए उसके खाते में जाने के बजाय सीहोर के ही रहने वाले मनोज राठौर के खाते में चले गए। किसान ने अपने पैसे वापस लेने के लिए कई आवेदन दिए, पिछले 2 महीनों से किसान अपनी फसल के पैसे लेने के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगा रहा है, लेकिन अबतक किसान की कोई सुनवाई नहीं हुई।

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क्या कहते हैं जिम्मेदार ?

इस संबंध में जब ढाबला सहकारी संस्था के प्रबंधक का कहना है कि, इसमें हमारी कोई गलती नहीं। किसान के आधार कार्ड से लिंक खाते में गेहूं की फसल का पैसा पहुंचता है, जो भी गड़बड़ी हुई है वो ऊपर से ही हुई है।