
नैनपुर-भोमा व छिंदवाड़ा-चौरई के बीच 19 को होने वाला सीआरएस मुश्किल
सिवनी. छिंदवाड़ा-नैनपुर-मंडला फोर्ट गेज कनवर्जन कार्य रेलवे के अधिकारियों और निर्माणदायी कंपनियों की लापरवाही की पोल खोल रहा हैं। निर्धारित लक्ष्य के पार होने के बाद भी यह कार्य पूरा नहीं हो सका है। नैरोगेज बंद होने के बाद परिवर्तित लाइन पर ब्राडगेज चलने की राह देख रही कई आंखे बंद हो गई तो कई अब भी आस लगाए बैठी है, लेकिन लगातार लक्ष्य तय कर फिर समय बढ़ाने वाले रेलवे के अधिकारी सीआरएस के लिए तय समय में इसे करा पाने में सक्षम नजर नहीं आ रहे। अनुमान लगाया जा रहा है कि रेलवे अमला एक से दो सप्ताह का समय बढ़ाएगी। नैनपुर से भोमा, छिंदवाड़ा से चौरई व कटंगी से तिरोड़ी के बीच सीआरएस कराने की तैयारी है। इसके लिए १९ फरवरी से सीआरएस का समय तय किया गया है।
नैनपुर से भोमा करीब 45 किमी का सीआरएस होना है। उक्त रेलवे लाइन पर वैयलास्ट का कार्य किया जा रहा है। इसके लिए तकनीकी अमला लगा हुआ है। आठ फरवरी को वैयलास्ट कराने के पूर्व इंजन दौड़ाकर नैनपुर से पलारी तक टेस्टिंग किया गया है। पलारी से भोमा के बीच कुछ बड़े तकनीकी कार्य के पूरा होने का इंतजार रेलवे महकमा कर रहा है। बताया जा रहा है कि रविवार को पलारी से भोमा की ओर करीब छह किमी वैयलास्ट कार्य के लिए लाइन पर गाड़ी दौड़ी है। उप मुख्य अभियंता मनीष लावनकर कान्हीवाड़ा के पास जुरतरा पहुंचे और कार्यों का निरीक्षण किए। लावनकर ने सिवनी की ओर चल रहे कार्यों का भी रविवार को निरीक्षण किया है। चौरई से छिंदवाड़ा के बीच भी सीआरएस किया जाना है। रेलवे का दावा है कि सीआरएस के लिए सब तैयार हो चुका है, लेकिन धरातल पर गौर करें तो निर्धारित अवधि में यहां भी सीआरएस किया जाना संभव नहीं है। कई तकनीकी कार्य अब भी अधूरे हैं। भोमा से नैनपुर के बीच कार्यपालन अभियंता बीआर मीणा, छिंदवाड़ा से चौरई के बीच कार्यपालन अभियंता एसके सिंह व कटंगी से तिरोड़ी के बीच कार्यपालन अभियंता एसके मिश्रा के नेतृत्व में कार्य चल रहा है। उप मुख्य अभियंता मनीष लावनकर लगातार इसकी निगरानी कर रहे हैं। सीआरएस को लेकर अधिकारियों ने दिन-रात एक कर दिया है।
सिवनी यार्ड का कार्य पूरा होने में लगेगा छह माह का समय
उक्त सीआरएस के बाद रेलवे अमले का पूरा जोर भोमा से सिवनी और चौरई से सिवनी के बीच के कार्यों को पूरा करने पर रहेगा। धरातल पर गौर करें तो सिवनी यार्ड में चार लाइन है। प्लेटफार्म, टाइल्स, फ्लोरिंग, रंगाई-पोताई, ग्रिल, रैम्प, ब्रिज गुमटी, दो लेबल क्रासिंग, छिंदवाड़ा क्रासिंग के पास ब्रिज का कार्य आदि अभी तक शुरू नहीं हुआ है। भोमा से सिवनी के बीच भुरकलखापा, डुंगरिया, राघादेही के ब्रिज के कार्य अभी चल रहे हैं। सिवनी से चौरई के बीच पीपरडाही रेलवे स्टेशन का कार्य हो चुका है, लेकिन स्टेशन सहित कुछ स्थानों पर बनाई गई बिल्डिंग की गुणवत्ता को लेकर निर्माणदायी कंपनी के खिलाफ रेलवे ने पेनाल्टी की कार्रवाई की है। खास है कि उक्त कार्य को पूरा करने का समय रेलवे ने जून २०२१ रखा है। उक्त समय में ये पूरा होते नजर नहीं आ रहा है।
निर्माणदायी कंपनियां कर रही धीमा कार्य, रेलवे अफसरों का नहीं हैं अंकुश
भोमा से चौरई के बीच अलग-अलग कंपनियों को कार्य मिला है। बरघाट इएलसी से चौरई तक का कार्य रायसिंह कंपनी के पास है। भोमा से बरघाट इएलसी के पहले तक का कार्य सीएल कारला और बिल्डिंग का कार्य त्रिशुल कंपनी आदि के पास है। बताया जा रहा है कि बिल्डिंग बनाने वाली कंपनी के खिलाफ पेनाल्टी की कार्रवाई की गई है। रायसिंह कंपनी का कार्य काफी धीमी गति से चल रहा है। इसके कई कार्य पेटी पर दूसरी कंपनिया करा रही है। रेलवे के अधिकारियों से भी उक्त कंपनी के तालमेल सही नहीं बताए जा रहे हैं। धरातल पर सीएल कारला कंपनी का कार्य भी धीमी गति से चल रहा है। खास है कि करीब एक माह के अंदर उक्त सभी कंपनियों के करीब १० करोड़ रुपए के बिल पास किए गए हैं। कुछ माह पूर्व रेलवे के पास पैसे की किल्लत हुई थी। करीब एक माह पहले निरीक्षण पर आए सीएओ के सामने यह मामला आया था। उन्होंने दूसरे मद से निर्माणदायी कंपनियों को भुगतान करने का निर्देश संबंधित विभाग को दिया। इसके बाद भुगतान की कार्रवाई हुई। सांसद डॉ. ढाल सिंह बिसेन ने इस बजट में करीब 150 करोड़ रुपए उक्त परियोजना को दिलाया है।
Published on:
15 Feb 2021 07:26 pm
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