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Good news: शरहद को पार कर पेंच टाइगर रिजर्व के जंगल में पहुंचे प्रवासी पक्षी

पाकिस्तान सहित अन्य देशों से आए पक्षियों ने बनाया बसेरा

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सिवनी. रिफ्यूजी फिल्म का गीत पंछी, नदिया, पवन के झोंके, कोई सरहद ना इन्हें रोके…यह गाना इस समय पेंच टाइगर रिजर्व में चहचहा रहे पक्षियों पर बिल्कुल सटिक बैठती है। दरअसल मौसम में जैसे-जैसे सर्दी बढ़ रही है, वैसे-वैसे पेंच नेशनल पार्क एवं आसपास के क्षेत्रों में प्रवासी मेहमानों की आमद भी होने लगी है। जिले की आबोहवा सरहद पार के परिंदों को पसंद आती है। जलस्रोतों के साथ प्राकृतिक पहाडिय़ों और हरियाली के बीच प्रवासी पक्षियों को मुकम्मल रहवास मिलता है। लगभग एक माह से पक्षियों के चहचहाहट से पहाड़ी, जल सरोवरों के किनारे, सिवनी के जंगल दिन रात गूंज रहे हैं। पक्षी और प्रकृति प्रेमी कैमरे लेकर उनकी अटखेलियां कैप्चर कर रहे हैं। नेचरलिस्ट एवं फोटोग्राफर इमरान खान ने बताया कि प्रवासी पक्षियों का दिसंबर तक आना लगा रहेगा। हालांकि इस बार पक्षी देरी से आए हैं और 15 नवंबर के बाद दिखना शुरु हुए हैं। जबकि हर वर्ष अक्टूबर माह में पक्षी पेंच नेशनल पार्क के जंगल एवं आसपास के क्षेत्रों में दिखना शुरु हो जाते थे। इसकी वजह वातावरण परिवर्तन भी है। पक्षियों के आमद से पर्यटक भी काफी खुश हैं। पक्षी प्रेमियों में उनके कलरव के साथ सुंदर दृश्यों को कैमरे में कैद करने की उत्सुकता उनमें बनी हुई है। विशेषज्ञों के अनुसार सीजन बदलने के साथ प्रवासी पक्षियों का आना-जाना होता है।

बना रहे हैं घोसला, तीन से चार माह बसेरा
नेचरलिस्ट ने बताया कि लद्दाख, कजाजिकस्तान, उजबेकिस्तान, पाकिस्तान सहित अन्य जगहों से होते हुए काफी संख्या में पक्षी अपने जिले में आ चुके हैं। पेंच नेशनल पार्क में खवासा के आसपास के क्षेत्रों में बहुतायत में पक्षी देखे जा सकते हैं। उन्होंने बताया कि बर्फीले देशों में सर्दी के मौसम में जब बर्फ पड़ती है तो पक्षियों के लिए भोजन उपलब्ध नहीं हो पाता, इसलिए ये पक्षी भोजन और प्रजनन के लिए उडकऱ यहां पहुंचते हैं। अक्टूबर में ये पक्षी यहां आना शुरू कर देते हैं और प्रजनन काल पूरा कर फरवरी अंत से मार्च तक बच्चों के साथ उड़ान भर जाते हैं। जिले के जंगल, पहाड़ों में इंडियन ब्लैक बर्ड, कॉमल टेलोबर्ड, अल्ट्रा मरीन, साइबेरियन बर्ड, पैराग्रिन फंकर, रेडिस अल्डक, पोचार्ड, मेलार्ड, हाइड्रोला, कॉमन क्रेन समेत करीब 100 प्रजाति के विदेशी पक्षी पहुंचते हैं। ये करीब 5 से 6 माह का प्रवास कर वापस अपने देश लौट जाते हैं।

पर्यटकों को भा रहे हैं खूबसूरत नजारे
हजारों मील का सफर तय कर पेंच नेशनल पार्क में आए इन प्रवासी पक्षियों की चचहचहाहट सुनकर पर्यटक भी गदगद हो जा रहे हैं। पानी से भरे जलाशय, पेड़ों पर चहचहाते हजारों की संख्या में प्रवासी पक्षियों को पर्यटक अपने कैमरे में कैद कर रहे हैं।

इनका कहना है
पेंच टाइगर रिजर्व में काफी संख्या में प्रवासी पक्षी आए हुए हैं। पर्यटक भी इन्हें देखकर खुश हो रहे हैं। हर वर्ष पक्षियों का आना-जाना रहता है।
रजनीश सिंह, डिप्टी डायरेक्टर, पेंच टाइगर रिजर्व