
सिवनी. शहर के बारापत्थर निवासी मध्यप्रदेश की प्रतिष्ठित एकलव्य पुरस्कार से सम्मानित प्रियंका वानखेड़े नाम की मोहताज नहीं है। वह हॉकी में अंतर्राष्ट्रीयस्तर पर जलवा बिखेर रही है। हालांकि उन्हें यहां पहुंचने में बहुत मुश्किलों का सामना नहीं करना पड़ा। जब उन्होंने हॉकी खेलने की शुरुआत की तो मां घर में हॉकी छुपाने लगी। इसके बावजूद प्रियंका का हौसला कम नहीं हुआ और उन्होंने मैदान में गोल दागना जारी रखा।
प्रियंका ने बताया कि वर्ष 2008 में वह ग्वालियर हॉस्टल चली गई। एए एउण्वह वर्ष 2015 तक वहां रही। वर्ष 2015 में खेल कोटे से उनकी नौकरी वरिष्ठ लिपिक के पद पर जालंधर रेलवे में लग गई। इसके पूर्व वह वर्ष 2013 में हालैण्ड वल्र्ड यूथ हॉकी टूर्नामेंट खेलने गई। वहां आस्ट्रेलिया, कोरिया, न्यूजीलैण्ड, कजाकिस्तान से हुआ। इस टूर्नामेंट में उनकी टीम विजेता रही।
वर्ष 2014 में वह अंडर-21 टीम का प्रतिनिधित्व करते हुए न्यूजीलैंड में टेस्ट सीरीज हॉकी टूर्नामेंट खेलने गई, यहां मैच ड्रा रहा। प्रियंका फारवर्ड खेलती है। वह दो अंतर्राष्ट्रीय व 25 राष्ट्रीय मैच खेल चुकी है। एकलव्य के अलावा करीब दर्जनभर राष्ट्रीय सम्मान मिले हैं। दो फरवरी से 11 फरवरी तक वह रांची में राष्ट्रीय मैच खेलने गई थी। इस मैच में प्रदर्शन के आधार पर भारतीय टीम के लिए उनका चयन होगा। उनका सपना वर्ष 2020 के ओलम्पिक में खेलना है। भारतीय हॉकी टीम की उप कप्तान दीपिका ठाकुर उनकी पसंदीदा खिलाडिय़ों में है। उनका मानना है कि देश में दीपिका जैसी कोई खिलाड़ी नहीं है। वह वर्तमान समय में सुबह तीन घंटे जिम और शाम को करीब तीन घंटे खेल मैदान में प्रैक्टिस करती है।
यदि मन में सच्ची लगन और कुछ कर गुजरने का जज्बा हो तो मनचाहे सपने पूरे करने से कोई नहीं रोक सकता है। अभी तो शुरुआत है, मुझे ओलम्पिक में भारतीय टीम का हिस्सा बनकर देश के लिए पदक हासिल करना है।
- प्रियंका वानखेड़े, इंटरनेशनल हॉकी प्लेयर
Published on:
09 Mar 2018 07:09 pm
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