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एमपी का ‘बाजीराव’, चीते की चाल, बाज की नजर… जरूर पढ़ें ये इंट्रेस्टिंग खबर

चीते की चाल, बाज की नजर और बाजीराव की तलवार पर संदेह नहीं करते। कभी भी मात दे सकती है...फिल्म बाजीराव मस्तानी का यह डायलॉग तो सबने सुना है, यह डायलॉग हकीकत बनकर जंगल में दिखने लगे तो.. जरूर पढ़ें ये खबर...

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चीते की चाल, बाज की नजर और बाजीराव की तलवार पर संदेह नहीं करते। कभी भी मात दे सकती है...फिल्म बाजीराव मस्तानी का यह डायलॉग तो सबने सुना है, यह डायलॉग जंगल में बिना बोले दिखने लगे तो..। पेंच टाइगर रिजर्व के बफर रूखड़ में कुछ ऐसा ही दिखा। कुछ समय पहले यहां का राजा बाघ कुरईगढ़ हिंसक हुआ तो उसे शिफ्ट किया। 4 किशोर बाघ साम्राज्य बनाने का प्रयास करने लगे, तब बालाघाट के लालबर्रा के बाघ बाजीराव ने कदम रखा।

पहले तो उसने 2022 में मराठा पेशवा बाजीराव की तरह क्षेत्र का जायजा लिया। फिर 8 साल के युवा बाघ बाजीराव ने इलाके पर बाज की पैनी नजरें रखीं और फिर कुशल योद्धा की तरह कई बार हमले किए। आखिरकार उसने सभी किशोर बाघों को क्षेत्र से खदेड़कर रूखड़ में अपना साम्राज्य स्थापित कर लिया।

सैलानियों को दिख रहा बाघ

रूखड़ परिक्षेत्र में सुबह, शाम व देर शाम तीन समय पर्यटकों को सफारी का मौका मिलता है। रोज 8-10 सफारी पर्यटकों को लेकर जंगल में जाती है। किसी न किसी समय पर्यटकों को बाजीराव नजर आ ही जाता है। इसके अलावा तीन बाघिन और शावक भी उक्त क्षेत्र में नजर आ रहे हैं।

इसलिए...नाम दिया बाजीराव

- पेशवा बाजीराव बल्लाल का जन्म 18 अगस्त 1700 को ब्राह्मण परिवार में बालाजी विश्वनाथ और राधाबाई के घर में हुआ था।

- उनके पिता मराठा छत्रपति शाहूजी महाराज के प्रथम पेशवा थे।

- वे बचपन से ही सैन्य गतिविधियों में पिता के साथ जाते थे। महज 20 साल की उम्र में ही वे पेशवा बन गए।

- 40 साल की उम्र में 42 युद्ध लड़े और सभी में जीत हासिल की।

- उनकी नजरें बाज की तरह, युद्ध कौशल शानदार दुश्मनों पर हमला करने में वे चीते की चाल से भी तेज थे।

- डिंडौरी, मंडला, रूखड़, सिवनी, बालाघाट, सतपुड़ा, कॉरिडोर से बालाघाट से आया बाघ

- कुरईगढ़ का राज खत्म

- पेंच टाइगर रिजर्व के बफर जोन रूखड़ में बाघ कुरईगढ़ की धमक थी।

- उसने कई चरवाहों को शिकार बनाया तो खतरा बढ़ा।

- वन अमले ने उसे नवंबर 2023 में बांधवगढ़ भेज दिया। तब क्षेत्र रण बन गया था।

इसलिए ‘बाजीराव’

- सतपुड़ा-पेंच-कान्हा कॉरिडोर से बालाघाट जिले के लालबर्रा का एक बाघ 2022 में रूखड़ आया। प्रबंधन ने नाम बाजीराव रखा। बाघ सन् 1700 में जन्मे मराठा योद्धा पेशवा बाजीराव बल्लाल की तरह कुशल योद्धा का परिचय देता रहा।

- कुरईगढ़ के इलाके से निकलने के बाद यहां तीन बाघिन 3-4 शावकों के साथ रह रही है। इसी बीच तीन किशोर बाघों ने यहां साम्राज्य फैलाने की कोशिश की। बाजीराव ने तीनों को खदेड़ दिया।

- नवंबर 2023 से वह यहां लगातार नजर आ रहा है। पेंच टाइगर रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर रजनीश कुमार सिंह का कहना है, यहां बाजीराव ने अपना इलाका बना लिया है।

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इसलिए बाजीराव को पसंद आया इलाका

किसी भी बाघ को अपना क्षेत्र बनाने के लिए बाघिन की जरूरत होती है। रूखड़ में तीन बाघिन हैं और तीन-चार शावक भी हैं। शिकार के लिए यहां पर्याप्त संख्या में वन्यप्राणी भी हैं।

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