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बारिश के पानी को सहेजने में लापरवाही

वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाने में अनदेखी, कई शासकीय कार्यालयों में खराब पड़े हैं सिस्टम

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Mahendra Bhagel

Sep 01, 2016

seoni

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सिवनी.
बारिश का पानी जमीन में सहेजने शुरू की गई वाटर हार्वेस्टिंग योजना अफसरों की उदासीनता के चलते लापरवाही की भेंट चढ़ गई है। योजना में मकान बनाते समय हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाना अनिवार्य किया गया था, लेकिन जागरुकता के अभाव में चुनिंदा लोग ही लगा पाए है। जिन शासकीय दफ्तरों में यह लगे भी हैं, तो वह अपनी हालत पर आंसू बहा रहे हैं। बारिश का पानी नाली में बहकर जा रहा है और इसका परिणाम आगामी गर्मी के मौसम में फिर से सबके सामने आ जाएगा।

वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाना अनिवार्य है। गर्मी के मौसम में भीषण जलसंकट के कारण पैदा होने वाली परेशानी को देखते हुए शासन ने इसे गंभीरता से लिया था। आदेश जारी कर शहरी क्षेत्र में सभी जगहों पर बारिश का पानी जमीन में उतारने वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाने के निर्देश दिए थे। नगर पालिका प्रशासन को कहा था कि कोई मकान बनाता है तो उसे हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाना अनिवार्य किया जाए। बकायदा शुल्क भी जमा कराया जाना था, लेकिन यह योजन जिले में ठप पड़ी है।

शहर की जनसंख्या लगातार बढ़ते ही जा रही है। उसके हिसाब से वाटर हार्वेस्टिंग नहीं लगना कहीं न कहीं अनदेखी दर्शाता है। नगर में कुछ मकान ही होंगे जिनमें यह सिस्टम लगा हो। नपा की तरफ से इसका प्रचार-प्रसार नहीं कराने के कारण कई लोग ऐसे है जिनको वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम क्या होता है। इसके संबंध में कोई जानकारी नहीं है।

चुनिंदा सरकारी कार्यालयों में सिस्टम लगे हैं, तो वह उपेक्षा का शिकार हो रहे हैं। ये सिस्टम खराब पड़े हैं और इनको सुधारने की तरफ ध्यान नहीं दिया जा रहा है। हर वर्ष सिस्टम लगा होने के बाद भी हजारों लीटर पानी व्यर्थ बह जाता है। शहर के कई सरकारी कार्यालयों में अभी तक वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम नहीं लगा है चाहे वह कलेक्ट्रेट हो या फिर एसपी कार्यालय, खनिज विभाग, भू अभिलेख कार्यालयों सहित कई ऐसे सरकारी कार्यालय है जिनमें वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम नहीं लगा है।

परमिशन के साथ देते हैं निर्देश

शहर में कोई व्यक्ति मकान बनाता है तो उसे नगर पालिका से परमिशन लेना पड़ती हैं। इस परमिशन में वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम को भी अनिवार्यता दी गई है। नपा वाटर हार्वेस्टिंग लगाने नागरिकों से साढ़े सात हजार रुपए शुल्क जमा कराती है। मकान बनाने पर यह सिस्टम लगाने के बाद वापस नागरिकों को यह राशि लौटा दी जाती हैं। कई तो इस राशि को जमा कराने के चक्कर में ही नपा से अनुमति नहीं लेते हैं और काम शुरू कर देते हैं। सिस्टम लगाने की यह योजना फेल होती नजर आ रही है। अफसर जरूर यह कह रहे है कि वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाने के उनकी तरफ से निर्देश जारी किए हैं, लेकिन निर्देश के बाद भी काम गति नहीं पकड़ सका।

यह है सिस्टम के फायदे

- वाटर हार्वेस्टिंग से पानी व्यर्थ नहीं जाते हुए जमीन में उतर जाता है।

- जमीन में पानी पहुंचने से जलस्त्रोतों को फायदा मिलता है।

-गर्मी के मौसम में भी वाटर लेवल बराबर होने से जलस्त्रोत अच्छा पानी देते हैं।

-सिस्टम लगने से पानी की समस्या से निजात मिल सकती है।

- सिस्टम से जमीन का वाटर लेवल भी बढ़ता है।

कैसे सहेजा जाएगा पानी

बारिश के मौसम में पानी गिरने पर वह व्यर्थ ही बहकर चला जाता है। जिससे गर्मी के मौसम में अधिकांश जलस्त्रोत दम तोड़ देते थे, उनका जलस्तर नियमित बना रहे तथा जमीन का भी वाटर लेवल बराबर रहे इसे देखते हुए वाटर हार्वेस्टिंग को लेकर बढ़ावा दिया था। जिले में इस साल मानसून खासा मेहरबान है यदि इस पानी को सहेज लिया जाता तो गर्मियों में हालात खराब न होते। भूजल स्तर लगातार नीचे जा रहा है।

वर्जन....

नगरपालिका घर बनाने की अनुमति देने से पहले वाटर हार्वेस्ंिटंग के लिए राशि जमा कराती है लेकिन मकान मालिक इसके प्रति गंभीर नहीं हैं। वे राशि जमा कराने के बावजूद सिस्टम नहीं बनाते हैं। जागरुकता के लिए प्रयास किए जाएंगे।

किशन ङ्क्षसह ठाकुर, सीएमओ सिवनी