जिले की जीवनरेखा कहलाने वाली वैनगंगा जिस पर यह बांध बनाया गया है, उसे संवारने की मांग कई बार कई स्तरों पर उठती रही है लेकिन अबतक इस दिशा में ठोस सकारात्मक प्रयासों का अभाव ही रहा है जिसका नतीजा यह है कि मानसून के खत्म होते होते यह नदी सूख जाती है। लखनवाड़ा और वैनगंगा के उद्गम स्थल मुंडारा में मकरसंक्राति के पहले ही सूख जाते हैं। भक्तों ेके स्नान के लिए स्थानीय बोरों से पानी लाकर छोड़ा जाता है। छपारा के हासिम, साजिद खान और मंजू पटेल जिन्होंने पहले भी प्रशासन को वैनगंगा को बचाने के लिए ज्ञापन सौंपा हैं उनका कहना है कि गर्मि$यों के मौसम में जब नदी अधिकतर जगहों पर सूख चुकी है उसके तल में जमा सिल्ट को साफ किया जा सकता है। इसके अलावा नदी के किनारों पर वृक्षारोपण जैसी दीर्घकालिक परियोजना शुरु की जाए।