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सरकारी दफ्तरों में अफसरों की कुर्सी खाली, प्रभारी के जिम्मे चल रहा काम

विधायक ने कहा ट्रेनिंग सेंटर बन गया है लखनादौन

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सरकारी दफ्तरों में अफसरों की कमी, प्रभारी के जिम्मे चल रहा काम

सरकारी दफ्तरों में अफसरों की कमी, प्रभारी के जिम्मे चल रहा काम

सिवनी. जिले के आदिवासी विकासखंड घंसौर को प्रभारियों के भरोसे छोडऩे के आरोप इन दिनों जिला प्रशासन पर घंसौर की जनता द्वारा लगाए जा रहे हैं। दरसल घंसौर में लगभग 18 सरकारी विभाग काम करते हैं, जिनपर स्थाई नियुक्तियों का न होना घंसौर की जनता के लिए समस्या बना हुआ है। इस पर जनप्रतिनिधियों, नेताओं की चुप्पी जनता के लिए आक्रोश का कारण बन रही है।
जानकार बताते हैं कि घंसौर में संचालित 18 सरकारी विभागों में से आधे से ज्यादा विभागों में या तो प्रभारी अधिकारी हैं या फिर पद खाली ही पड़े हुए हैं। जिसमें राजस्व विभाग की तो स्थिति दयनीय बनी हुई है। राजस्व विभाग में अनुविभागीय अधिकारी से लेकर तहसीलदार एवं नायब तहसीलदार जैसे पदों पर प्रभारी अधिकारी हैं, जबकि प्रभारी अधिकारियों का घंसौर में कभी-कभार ही आना होता है, जिससे जनता के काम समय पर नहीं हो पा रहे हैं एवं जनता हलकान हो रही है।
जनजाति कार्य विभाग की स्थिति और भी खराब नजर आती है, घंसौर से संचालित लगभग 28 हायर सेकंडरी व हाई स्कूलों में से ज्यादातर प्रभारियों के भरोसे ही संचालित हो रहे हैं। स्वयं मंडल संयोजक भी वर्षों से प्रभारी हैं, जबकि छात्रावासों की भी जिम्मेदारी प्रभारियों के ही कंधे पर है। जिले के एकमात्र एकलव्य आवासीय विद्यालय में भी प्रभारी प्राचार्य ही अपनी सेवाएं दे रहे हैं। जबकी स्वास्थ्य विभाग में भी विशेषज्ञ डॉक्टरों एवं क्लर्कों की कमी देखी जा सकती है। बात स्कूल शिक्षा की करें तो बीआरसीसी से लेकर बीएसी एवं सीएसी सभी प्रभारी हैं। कई शालाएं तो शिक्षक विहीन ही संचालित हो रहीं हैं। जबकि कई प्रभारियों के भरोसे चल रही हैं।
जनपद पंचायत में भी विकासखण्ड अधिकारी को कुरई जनपद में प्रभारी सीईओ बनाए जाने के बाद अब तक किसी अन्य को विकासखण्ड अधिकारी नहीं बनाया गया है , जिसका असर इसी माह विकासखण्ड के सभी शिक्षकों को उठाना पड़ा था। जबकि एसडीओ एवं कई अन्य पद भी रिक्त हुए हैं, जिनमें प्रभारी अधिकारी अपनी सेवाएं दे रहे हैं। जबकि महिला एवं बाल विकास विभाग में स्वयं परियोजना अधिकारी प्रभारी हैं एवं इनका कभी-कभी ही घंसौर आना होता है, जिससे पूरा कार्यालय भगवान भरोसे चल रहा है। इसी तरह कृषि विभाग के भी हाल कुछ यूं ही हैं। यहाँ ग्राम सेवकों व अन्य कर्मचारियों की कमी साफ देखी जा सकती है जबकि घंसौर में संचालित अन्य दफ्तरों में प्रभारियों के नाम सूचना पटल पर देखा जा सकता है।
शासकीय कार्यालर्यों को प्रभारियों के भरोसे संचालित किए जाने से जनता को हो रही परेशानियों के मुद्दे पर जब क्षेत्रीय जनप्रतिधियों से बात की गई, तो सत्ताधारी दल भाजपा के नेता सिर्फ आश्वासन देते नजर आए तो वहीं विपक्ष में बैठी कांग्रेस के नेता इसे सरकार में बैठे लोगों की नाकामी बताकर चुटकी ले रहे हैं, वहीं इन सब के बीच जनता को हो रही परेशानियों पर कोई ध्यान नहीं दे पा रहा है।
आरोप-प्रत्यारोप लगा रहे जनप्रतिनिधि-नेता
योगेंद्र सिंह बाबा विधायक, लखनादौन का कहना है कि मैंने घंसौर में स्थाई अधिकारियों नियुक्ति के लिए प्रदेश शासन के मंत्री से भी बात की है, मगर कोई स्थाई समाधान अब तक नहीं निकला है, यह सरकार की विफलता है। हम लगातार प्रयास कर रहे हैं जनता की परेशानियों से भाजपा सरकार में बैठे लोगों को कोई लेना-देना नहीं है, घंसौर को ट्रेनिंग सेंटर की तरह बना दिया गया है। वहीं प्रमोद पटेल जिला मंत्री, भाजपा ने कहा कि अधिकारियों की कमी घंसौर समेत पूरे जिले में है। हमने जिले के प्रभारी मंत्री एवं जिला अध्यक्ष से इस विषय में चर्चा की है। उन्होंने जल्द रिक्त पदों पर स्थाई नियुक्ति कराने की बात कही है। कांग्रेसियों का काम चुटकी लेना है, वे चुटकी ही ले सकते हैं।