1 जनवरी 2026,

गुरुवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

मेरी खबर

icon

प्लस

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

भोपाल भेजी रिपोर्ट, सिवनी जिले के 329 सरकारी स्कूलों में हो सकता है हादसा

- अतिवृष्टि के कारण जिले के सरकारी स्कूलों के बिगड़े हालात

2 min read
Google source verification
जिले के जर्जर स्कूलों के हालात

जिले के जर्जर स्कूलों के हालात

सिवनी. इस वर्ष प्रदेश के सर्वाधिक वर्षा वाले जिलों में सिवनी का नाम है। जिले में लगातार बारिश से हजारों किसानों की फसलें तबाह हुई हैं, तो वहीं रिहायशी इलाकों में भी काफी नुकसान हुआ है। कई जगह नदी-नाले में बहने से अब तक आधा दर्जन लोगों की जान जा चुकी है। तो जिले में मकान-दीवार गिरने से कई लोग जान दे चुके हैं और कई गंभीर घायल हुए हैं। इधर कई सरकारी इमारतों की हालत भी ऐसी है, कि कभी भी हादसा हो सकता है।


शिक्षा विभाग की रिपोर्ट में खुलासा
-राज्य शिक्षा केन्द्र को सिवनी जिला शिक्षा केन्द्र से अतिवृष्टि (प्राकृतिक आपदा) के कारण क्षतिग्रस्त, दुर्घटना संभावित शासकीय प्राथमिक व माध्यमिक शालाओं की एक रिपोर्ट भेजी गई है। जिसमें विभाग ने बताया है कि सिवनी जिले के आठ विकासखण्ड सिवनी, बरघाट, कुरई, केवलारी, घंसौर, छपारा, धनौरा, लखनादौन के पुराने हो चुके 464 स्कूलों का सर्वे किया गया है। जिसमें जर्जर भवन होने से दुर्घटना की संभावना वाले 329 स्कूल हैं। वहीं भवन की छत गिरने की संभावना वाले 255, भवन की दीवार गिरने की संभावना वाले 60, प्लास्टर गिरने की संभावना वाले 351, दीवारों में दरारें 138, सीपेज वाले 353 और टपकने वाले स्कूल 426 हैं।

  • जिले में दो हजार से ज्यादा सरकारी स्कूल हैं। जिनमें हर वर्ष दर्ज हो रही बच्चों की संख्या को देखें, तो पता चलता है कि बहुत से गांव में आबादी तो बढ़ रही है, लेकिन बच्चों का दाखिला सरकारी स्कूलों में नहीं हो रहा है। कई जगह सरकारी स्कूल बंद हैं, निजी मकान में कक्षा लगाना पड़ रहा है। यहां से पालक बच्चों के नाम कटाकर प्राइवेट स्कूलों में लिखवा रहे हैं। कहीं-कहीं शिक्षकों के प्रयास के कारण ही बच्चों को अब तक रोके रखा गया है, लेकिन हालात देखकर शिक्षक भी अब हिम्मत हार रहे हैं। क्योंकि संसाधनों की समस्या के बीच बच्चों को अच्छी शिक्षा दे पाना मुश्किल हो रहा है। ददो साल से नहीं मिला बजटदो साल से नहीं मिला बजटदो साल से नहीं मिला बजटो साल से नहीं मिला बजटदो साल
  • जिले के 329 शासकीय प्राथमिक और माध्यमिक शाला में हादसे की संभावना है। इस बात से राज्य शिक्षा केन्द्र और जिले के अधिकारी तक वाकिफ हैं, लेकिन हालात सुधारने के लिए दो साल से कोई बजट नहीं मिला है। यह बात खुद जिला शिक्षा केन्द्र के अधिकारी कह रहे हैं। इंजीनियर वाशिद खान ने बताया कि दो साल से वार्षिक कार्ययोजना में जिले के जर्जर स्कूलों के हालात बताते हुए फंड की मांग हो रही है, लेकिन अब तक कोई भी राशि स्वीकृत नहीं हो पाई है। कई स्कूलों से लगातार बिगड़े हालात की खबरें मिल रही हैं, लेकिन चाहकर भी वहां काम कराना संभव नहीं हो पा रहा। से नहीं मिला बजटदो साल से नहीं मिला बजट