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सावन में शिव की नगरी हुई भक्तिमय

माहभर चलेंगे रामायण पाठ

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Shiva's town is worshiped

सावन में शिव की नगरी हुई भक्तिमय

सिवनी. सावन के दूसरे सोमवार को शहर के शिवालय भगवान भोलेनाथ के जयकारे से गूंज उठे। सुबह से मंदिरों में भक्तों का तांता लगा रहा। हर-हर भोले...। बम-बम भोले...। के जयकारे के बीच अलग-अलग मंदिरों में एक माह तक आयोजित होने वाले रामयण पाठ से पूरा क्षेत्र भक्तिमय बना हुआ है। मठ मंदिर में रामायण पाठ पूरे सावन भर जारी रहेगा। नगर से पांच किलोमीटर दूर बोरदई पहाड़ी स्थित महाकालेश्वर मंदिर में सुबह भगवान भोलेनाथ का रूद्राभिषेक हुआ। रूद्राभिषेक में सैकड़ों श्रद्धालु शामिल हुए।
पं. राघवेंद्र शास्त्री ने बताया कि सावन के सभी सोमवार को सुबह में भगवान भोलेनाथ का रूद्राभिषेक होता है।
स्थानीय सिद्धपीठ मठ मंदिर में लगातार 25 वर्षों से संपूर्ण श्रावण मास में होने वाली अखंड रामायण पाठ इस वर्ष भी प्रारंभ है। श्रावण मास में मठ मंदिर महाकाल समिति द्वारा गुरुवार को दोपहर एक बजे से शिवलिंग का सहस्त्रधारा से अभिषेक किया जाएगा। इस कार्यक्रम के प्रमुख व्यवस्थापक प्रमोद मेहरा ने बताया कि समिति की तरफ से यह सहस्त्रधारा अभिषेक प्रदोश के दिन सार्वजनिक तौर पर रखा गया है। अभिषेक में कोई भी सदस्य नि:शुल्क शामिल हो सकता है। इस कार्यक्रम में समस्त महाकाल समिति सदस्य सदन कश्यप, मयूर पारकर, दिलीप सोनी, विजय नामदेव, सुरेश यादव, गुड्डा सोनी, द्वारका बघेल एवं कुलदीप बघेल औार मठ मंदिर पुजारी गोविंद शुक्ला सहित श्रद्धालुजनों से शामिल होने की बात कही गई है।

सिवनी. नगर के अधिकांश मंदिरों, घरों समेत ग्राम क्षेत्रों में सावन मास में जगह-जगह अखण्ड रामचरित्र मानस का आयोजन किया जा रहा है। जिसके चलते नगर व गांव धर्मक्षेत्र में बदल गया है।
इसी प्रकार नगर के मठ मंदिर, शुक्रवारी चौक स्थित महावीर मंदिर समेत अनेक मंदिरों में सावन मास पर पूरे माह भर अखण्ड रामचरित्र मानस पाठ का आयोजन किया जाता है। हर साल की तरह इस साल भी मंदिरों में अखण्ड रामचरित्र मानस पाठ का आयोजन हो रहा है जहां श्रद्धालुजन पहुंचकर रामायण पाठ कर रहे हैं।
शनि मंदिर पलारी के पं. शिव प्रसाद मिश्रा ने बताया कि राम भक्त हनुमान का पूजन करने से लगभग समस्त देवी-देवताओं का पूजन हो जाता है। कलयुग में हनुमान की पूजा अपने मनोरथों को पूर्ण करने का सबसे प्रभावकारी और सरलतम माध्यम है। हनुमान जी अखण्ड ब्रह्मचारी व महायोगी भी हैं इसलिए सबसे जरूरी है कि उनकी किसी भी तरह की उपासना में वस्त्र से लेकर विचारों तक पावनताए ब्रह्मचर्य व इंद्रिय संयम को अपनाएं। इसी प्रकार शनि देव की पूजन करने से व्यक्ति के कष्टों का निवारण होता है। वहीं श्रावण मास में शिव पूजा का विशेष महत्व है। शिव अभिषेक करने भगवान शिव प्रसन्न होते हैं। इसके साथ ही श्रावण मास में अखण्ड राम चरित्र मानस का आयोजन मंदिरों व घरों में मनोवांछित फलों की प्राप्ति होती है।