
छपारा. हर गरीब को पक्का मकान देने के उद्देश्य से पीएम आवास योजना चल रही है। हालांकि इस योजना के तहत आवास निर्माण को लेकर दो सरकारी विभाग आमने-सामने आ गए हैं। सिवनी जिले के छपारा जनपद पंचायत के अंतर्गत आने वाली गंगई रैयत ग्राम पंचायत में ऐसा ही मामला सामने आया है। दरअसल ग्राम पंचायत गंगई रैयत संजय सरोवर बांध के निचले इलाके में बसा है। जहां अधिकांश भूमि जल संसाधन विभाग की है। ज्यादातर लोग बांध निर्माण से विस्थावित निवासरत हैं। यहां जल संसाधन विभाग की जमीन पर पीएम आवास का निर्माण किया गया है। इसे लेकर अपर वैनगंगा बांध उपसंभाग क्रमांक-3, भीमगढ़ के एसडीओ उदयभान मर्सकोले ने छपारा जनपद पंचायत के सीईओ को पत्र लिखकर कड़ी आपत्ति जताई है। जिसमें कहा गया है कि विभाग के स्वामित्व की भूमि पर प्रधानमंत्री आवास निर्माण पर रोक के लिए कई बार मौखिक, दूरभाष पर चर्चा एवं पत्राचार किया गया है। इसके बावजूद भी मुख्य कार्यपालन अधिकारी के आदेशों की अवहेलना अधिनस्थ ग्राम-पंचायत के सरपंच, पंच, सचिव कर रहे हैं। जियोटेक एवं हितग्राही की किस्त जारी कर पीएम आवास निर्माण कर अतिक्रमण को बढ़ावा दिया जा रहा है। जबकि न्यायालय तहसीलदार ने आवास निर्माण पर कार्य स्थगन आदेश जारी किया है। इसके बाद भी कार्य जारी है। नियमों का हवाला देते हुए उन्होंने लिखा है कि प्रधानमंत्री अवास निर्माण स्वयं की जमीन पर या आबादी की भूमि पर बनाने का प्रावधान है। पत्र में अनुविभागीय अधिकारी ने मुख्य कार्यपालन अधिकारी से यह सवाल किया है कि किन नियमों के तहत जल संसाधन की जमीन पर पीएम आवास योजना के तहत निर्माण की किस्तें जारी की जा रही है।
गिराएंगे मकान, फिर हुआ निर्माण तो कराएंगे एफआईआर
पत्र में अनुविभागीय अधिकारी ने मुख्य कार्यपालन अधिकारी से कहा है कि पीएम आवास हटाने की कार्यवाही पर होने वाले व्यय की संपूर्ण जिम्मेदारी आपके विभाग की होगी। भविष्य में जल संसाधन विभाग की जमीन पर पीएम आवास का निर्माण होता है तो पंचायत विभाग के अधिकारी, कर्मचारी पर एफआईआर दर्ज कराया जाएगा। पत्र से यह स्पष्ट होता है कि अब तक जल संसाधन विभाग की जमीन पर पीएम आवास योजना के तहत जो मकान बनाए गए हैं उनको तोडऩे की कार्यवाही जल्द ही विभाग कराने की तैयारी में है।
उठता है बड़ा सवाल
एक तरफ एसडीओ वर्ष 2024 से अब तक गंगई रैयत में जल संसाधन की भूमि में बने आवास को लेकर आपत्ति जता रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ जल संसाधन की भूमि पर ही वर्ष 2016-17 और 2021 में ग्राम पंचायत के द्वारा 113 पीएम आवास योजना के तहत यहां मकान बनाए गए हैं। इसे लेकर विभाग ने कोई रोक नहीं लगाई। वर्ष 2024-25 में 14 और फिर 28 पीएम आवास योजना की स्वीकृति यहां ग्राम पंचायत ने दी है। 14 हितग्राहियों की पहली किस्त भी ग्राम पंचायत ने जारी कर दी है। 11 हितग्राहियों को दूसरी किश्त जारी की गई है। तीसरी किस्त 6 लोगों को जारी हो चुकी है। जबकि यहां 88 पीएम आवास और बनाए जाने हैं। जिसको लेकर लक्ष्य आया है, लेकिन इस लक्ष्य को अब पूरा करने में जल संसाधन विभाग अड़ंगा लगा रहा है। लोग विभाग के इस दोहरे मापदंड को लेकर आपत्ति जता रहे हैं।
अवैध कब्जा को लेकर कोई कार्यवाही नहीं
जन संसाधन विभाग की भूमि पर भीमगढ़ के गंगई रैयत की कॉलोनी में कई लोगों ने अवैध कब्जा कर रखा है। इसके बावजूद भी अधिकारी कार्यवाही नहीं कर रहे हैं। जबकि बांध से विस्थापित लोगों को पीएम आवास योजना से वंचित किया जा रहा है।
नहीं मिल रही दूसरी किश्त
पीएम आवास का पहली किस्त मिलने के बाद गंगई रैयत ग्राम पंचायत के हनुमान गिरी बुजुर्ग दंपत्ति अपना कच्चा मकान तोडकऱ पक्का मकान बना रहे थे। दूसरी किस्त जारी नहीं की जा रही है। जिसके चलते वे परेशान हैं। जनसुनवाई में भी गुहार लगाई है।
इनका कहना है…
जल संसाधन की भूमि पर 113 पीएम आवास योजना के तहत मकान बनाए जा चुके हैं। विभाग के अधिकारी ने पत्र लिखकर आपत्ति जताई है। हमने इस मामले को लेकर हमारे उच्च अधिकारियों को अवगत करा दिया है। पीएम आवास योजना के सर्वे और अन्य किस्त जारी करने में दिक्कत आ रही है।
राकेश दुबे, जनपद पंचायत सीईओ, छपारा
Published on:
06 Mar 2025 10:46 am
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