1.90 रुपए प्रति यूनिट की दर से मिलेगी बिजली, खपत के बाद शेष बिजली एमपीईबी को की जाएगी सप्लाई
शहडोल. पं. एस एन शुक्ला विश्वविद्यालय में सोलर प्लांट से बिजली उत्पादन का कार्य प्रारंभ हो गया है। यह पहला विश्वविद्यालय होगा जो कि सोलर प्लांट की बिजली से पूरी तरह से रोशन होगा। साथ ही खपत के बाद बची हुई बिजली ग्रिड के माध्यम से एमपीईबी को सप्लाई करेगा। जो भी डिफरेंस आएगा वह विश्वविद्यालय के खाते में जुड़ेगा। लगभग दो वर्ष से सोलर प्लांट को लेकर कार्य किया जा रहा था। उल्लेखनीय है कि पं एस एन शुक्ला विश्वविद्यालय को बिना पैसे खर्च किए ही यह सौगात मिली है। जिससे कि विश्वविद्यालय को काफी राहत मिलेगी। विवि प्रबंधन को अभी तक भारी-भरकम राशि एमपीईबी को बतौर बिल जमा करनी पड़ती थी। अब जब सोलर प्लांट से बिजली उत्तपादन का कार्य प्रारंभ हो गया हो तो धीरे-धीरे यह बोझ कम हो जाएगा और प्रबंधन को बहुत ही कम भुगतान करना पड़ेगा।
180 केव्ही का उत्पादन
पं. एसएन शुक्ल विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ विनय सिंह ने बताया कि ऊर्जा विकास निगम के सहयोग से यह सोलर प्लांट विश्वविद्यालय में लगाया गया है। सोलर प्लांट की 180 केव्ही विद्युत उत्पादन की क्षमता है। जिसमें से 140 केव्ही प्रशासनिक भवन को और 40 केव्ही एकेडमिक भवन में विद्युत सप्लाई की जाएगी। जिसके एवज में विश्वविद्यालय को 1.90 रुपए प्रति यूनिट की दर से बिल का बहन करना पड़ेगा। जो कि अभी तक आने वाले बिजली बिल से काफी कम है।
प्रबंधन को समस्या से मिलेगा छुटकारा
सोलर प्लांट से विद्युत उत्पादन प्रारंभ होने से प्रबंधन को बिजली की समस्या से भी निजात मिल गई है। उल्लेखनीय है कि अभी तक बिजली ट्रिपिंग, कम वोल्टेज सहित अन्य समस्याओं का सामना प्रबंधन को करना पड़ रहा था। सोलर प्लांट प्रारंभ होने के बाद अब प्रबंधन को इस समस्या से भी छुटकारा मिल जाएगा।
15 हजार यूनिट का एग्रीमेंट
उल्लेखनीय है कि अभी तक पं एस एन शुक्ला विश्वविद्यालय प्रबंधन ने एमपीईबी से 15 हजार युनिट की एग्रीमेंट एमपीईबी से किया था। जिसके एवज में प्रतिमाह प्रबंधन को दो से ढ़ाई लाख रुपए एमपीईबी को बतौर बिल जमा करने पड़े थे। सोलर प्लांट से विद्युत उत्पाद प्रारंभ होने के बाद यह बोझ धीरे-धीरे कम हो जाएगा और प्रबंधन को आधे से भी कम राशि भुगतान करना पड़ेगा।
ग्रिड से एमपीईबी को सप्लाई करेंगे बिजली
सोलर प्लांट के माध्यम से जितनी मात्रा में बिजली उप्तादन होगी वह पहले विश्वविद्यालय को सप्लाई की जाएगी। खपत के बाद जितनी बिजली की बचत होगी वह ग्रिड के माध्यम से एमपीईबी को सप्लाई की जाएगी। इसमें जो भी डिफरेंस आएगा वह विश्वविद्यालय के खाते में जुड़ेगा। इसके बाद मार्च माह में जो भी राशि जुड़ेगी वह बिल में जमा होगी।
इनका कहना है
सोलर प्लांट से विद्युत उत्पादन का कार्य प्रारंभ हो गया है। बिना खर्च के विवि को यह सौगात मिली है। इससे सस्ते दर पर विवि को बिजली मिलेगी। खपत के बाद जो बिजली बचेगी उसे ग्रिड के माध्यम से एमपीईबी को सप्लाई की जाएगी।
प्रो. मुकेश तिवारी, कुलपति पं. एसएन शुक्ल विश्वविद्यालय।