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सिकलसेल मरीजों के लिए बड़ी राहत: पेंशन, छात्रवृत्ति व आरक्षण के साथ रेलवे में भी मिलेगी छूट

सिकलसेल मरीजों का बनेगा प्रमाण-पत्र, पेंशन, छात्रवृत्ति व आरक्षण का भी मिलेगा लाभ

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Relief to the state, positivity rate decreased with the number of infected patients

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शहडोल. आदिवासी अंचल में लगातार बढ़ रही सिकलसेल बीमारी के मरीजों को अब दिव्यांगता का प्रमाण-पत्र मिलेगा। इसके साथ ही पेंशन, छात्रवृत्ति और आरक्षण में भी लाभ दिलाने का प्रयास किया जा रहा है। जिला स्वास्थ्य विभाग के साथ दिशा वेलफेयर शहडोल द्वारा थैलेसिमिया और सिकलसेल मरीजों के दिव्यांग पत्र बनवाने के साथ योजनाओं का लाभ दिलाने पहल की जा रही है। पेंशन, आरक्षण और छात्रवृत्ति का लाभ दिलाने के लिए वेलफेयर सोसाइटी की रुपाली सिंघई सिकलसेल मरीजों का प्रमाण-पत्र बनवाते हुए उन्हे योजनाओं से जोड़ रही हैं। जिससे सिकलसेल मरीजों को आने वाले समय में पेंशन और आरक्षण मिल सके। रुपाली सिंघल के अनुसार, सूची के बाद अब काउंसलिंग कर रहे हैं। सिकलसेल मरीजों को योजनाएं बता रहे हैं। गांवों से शहर प्रमाण-पत्र बनवाने बुलाया जा रहा है। सामूहिक गु्रप बनाकर लगातार संवाद भी कर रहे हैं।
प्रमाण-पत्र से पोर्टल में एंट्री, बनेगा यूडीआईडी कार्ड
जिला मेडिकल बोर्ड से दिव्यांगता सर्टिफिकेट बनवाने के बाद उन्हें स्वावलंबन पोर्टल पर अपने संबंधित दस्तावेज अपलोड करने होंगे। इससे उन्हें एक नया यूडीआईडी कार्ड मिलेगा, जो दिव्यांगता प्रमाण- पत्र के तौर पर पूरे देश में मान्य होगा। रुपाली सिघई के अनुसार, 1995 के दिव्यांगता कानून में सिर्फ सात दिव्यांगता को ही जगह दी गई थी, लेकिन दिव्यांगता जन अधिकार कानून 2016 में 21 दिव्यांगता परिभाषित की गई हैं। इनमें थैलेसीमिया के साथ ही एसिड अटैक पीडि़त, हीमोफीलिया, मूक, पार्किसिंन, डेफ ब्लाइंड, लर्निंग डिसेबिलिटी, स्किल सेल को भी शामिल किया गया है। इसके बाद अब मरीजों को जोड़कर प्रमाण-पत्र बनवाया जा रहा है।
पढ़ाई से लेकर रेलवे में रियायत
जानकारी के अनुसार, प्रमाण पत्र और कार्ड बन जाने से उपचार के लिए कहीं जाने पर रेलवे यात्रा भत्ता में रियायत मिलेगी। इनकम टैक्स में छूट और सामाजिक न्याय विभाग से सभी प्रकार की सहायताएं मिल सकेंगी। सर्टिफिकेट बनने से इन बच्चों को दिव्यांगता पेंशन, छात्रवृत्ति, पढ़ाई और नौकरी में आरक्षण का लाभ मिलना शुरू हो जाएगा। इन सभी रियासतों और लाभ के लिए दिव्यांगता का प्रतिशत कम से कम 40 या उससे अधिक होना चाहिए। नए कानून के मुताबिक दिव्यांगता वाले व्यक्तियों को 12वीं तक की शिक्षा में 4 प्रतिशत और उच्च शिक्षा में 5 प्रतिशत आरक्षण मिलेगा। उन्हें बढ़ी हुई दरों पर वजीफा भी दिया जाएगा। इसके अलावा सभी प्रकार की सरकारी नौकरियों में 4 प्रतिशत आरक्षण भी मिलेगा।
प्रदेश के चार आदिवासी क्षेत्रों में सबसे ज्यादा सिकलसेल मरीज
आदिवासी क्षेत्रों के 4 जिलों में प्रदेश के 75 फीसदी से ज्यादा सिकलसेल के मरीज हैं। इसमें अनूपपुर, डिंडौरी के अलावा अलीराजपुर और छिंदवाड़ा हैं। हाल ही मेशहडोल में एक वर्ष में 2865 मरीजों की जांच की गई। इसमें 2643 गर्भवती महिलाएं थी। इस दौरान 72 सिकलसेल पॉजिटिव मरीज मिले हैं। इसके अलावा 77 सिकलसेल मरीज मरीज दर्ज हैं। जिन्हे अक्सर खून की जरूरत पड़ती है। मध्यप्रदेश का डिंडौरी उन 4 जिलों में शामिल है, जहां पर प्रदेश के 75 फीसदी से ज्यादा सिकलसेल मरीज शामिल है। सिकलसेल के 450 मरीज हैं। शहडोल संभाग का अनूपपुर भी प्रदेश के सबसे ज्यादा सिकलसेल मरीजों की संख्या वाले जिले में शामिल है। यहां 1200 मरीज हैं।