
Books of Rs. 5 million in public books, only 12 lakh books in the market
शहडोल . अप्रैल में वर्ष २०१८-१९ के नए शिक्षण सत्र के शुरू होने के मद्देनजर मध्यप्रदेश पाठ्य पुस्तक निगम ने संभागीय मुख्यालय के डिपो मेें कक्षा एक से बारहवीं तक की करीब पचास लाख की कीमत की पुस्तकेें भिजवाई है। जिसमें अब तक महज करीब १२ लाख रुपए की पुस्तकों का उठाव लाइसेन्सधारी दुकानदारों ने किया है। शेष ३८ लाख की पुस्तकें डिपो के गोदाम में रखी हुई हैं। जिसका शनै: शनै: उठाव होने की बात कही जा रही है। गौरतलब है कि शासन के निर्देशानुसार वर्ष २०१८-१९ के शैक्षिक सत्र को शुभारंभ अप्रैल माह में कर तो दिया गया है, मगर उसकी तैयारियां अभी भी आधी अधूरी हैं। बाजार मेें कई कक्षाओं की मध्यप्रदेश पाठ्य पुस्तक निगम की गणित, विज्ञान, अंग्रेजी व हिन्दी विषयों की पुस्तकेें उपलब्ध नहीं है। जबकि कई निजी विद्यालयों में बच्चों की पढ़ाई शुरू हो चुकी है। ऐसी दशा में बच्चों के अभिभावकों को पुस्तकों के लिए भटकना पड़ रहा है।
इन कक्षाओं की नहीं है पुस्तकें
कक्षा विषय
पहली गणित
दूसरी गणित
पांचवी गणित
सातवीं गणित
आठवीं विज्ञान व अंग्रेजी
नौवीं हिन्दी व गणित
दसवीं गणित व विज्ञान
नोट-उक्त सारे विषय हिन्दी माध्यम के हैं, जबकि अंग्रेजी माध्यम में कक्षा एक से दस तक की गणित, कक्षा छठवीं एवं सातवीं और नौवीं व दसवीं की साइंस की किताबें बाजार में उपलब्ध नहीं है।
उमरिया में नहीं लाइसेन्सी दुकान
डिपो से प्राप्त जानकारी के अनुसार शहडोल संभाग मेें कुल १४ पुस्तक की दुकानों का लाइसेन्स मध्यप्रदेश पाठ्य पुस्तक निगम में बना है। जो वहां से पुस्तकों की खरीदी के लिए अधीकृत है। लाइसेन्सी दुकानों में एक दुकान बुढ़ार, एक ब्यौहारी, एक अनूपपुर जिले के कोतमा और शेष ११ दुकानें शहडोल संभागीय मुख्यालय की है। उमरिया जिले में निगम की कोई अधीकृत दुकान नहीं है। जिससे वहां के लोगों को पुस्तकों की खरीदारी में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
कम बिकती हैं ११वीं व १२वीं की किताबें
डिपो से प्राप्त जानकारी के अनुसार संभाग में कक्षा ग्यारहवीं एवं बारहवीं की पुस्तकें बहुत कम बिकती है। जिसकी मुख्य वजह निजी विद्यालयों द्वारा निजी प्रकाशन की पुस्तकों का चयन किया जाना है। निजी प्रकाशन में युगबोध एवं शिवलाल प्रकाशन की पुस्तकें निगम की पुस्तकों से दोगुनी कीमतों में धड़ल्ले से बिक रहीं है।
इनका कहना है
जो पुस्तकें बाजार में उपलब्ध नहीं है वह सारी पुस्तकें डिपो मेें आगामी १५ जून तक आवश्यकतानुसार उपलब्ध हो जाएगी। वैसे भी नए शिक्षा सत्र का वास्तविक आगाज जुलाई माह से ही होता है।
विपिन त्रिपाठी
डिपो प्रबंधक, मप्र पाठ्य पुस्तक निगम, शहडोल

Published on:
20 Apr 2018 02:05 pm
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