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दिव्यांग समझकर जिले नाली में फेंक दिया वो बच्चा अब विदेश में रहेगा

शिवालय शिशु गृह में 14 माह रहा, अब फिनलैंड की ईवा हेलेना ने लिया गोद

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शहडोल

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Manish Geete

Jan 31, 2023

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शहडोल। दिव्यांग होने की वजह से जिस बच्चे को परिजनों ने नाली के किनारे छोड़ दिया था, उस बच्चे की परवरिश अब विदेश में होगी। शहडोल के शिवालय शिशु गृह में पल रहे 14 माह के अक्षय को फिनलैंड के हिलसिंकी निवासी ईवा हेलेना पुत्रो ने एडाप्ट किया है। जिसे लेने के लिए वह रविवार को शहडोल पहुंची। जहां सोमवार को पूरी प्रक्रिया के बाद बच्चे को उनके सुपुर्द कर दिया गया। अब वह बच्चे को लेकर दिल्ली जाएंगी वहां से फिनलैंड के लिए रवाना होगी।

फिनलैंड निवासी ईवा हेलेना पुत्रो बायोपिक स्क्रिप्ट राइटर हैं। वह बच्चे को गोद लेना चाहती थी। इसलिए उन्होंने 21 मई 2022 को शिवालय शिशु गृह में पल रहे अक्षय को एडाप्ट करने के लिए केन्द्रीय दत्तक गृहण संसाधन प्राधिकरण नई दिल्ली में आवेदन कर रिजर्व किया था। जिसके बाद सोमवार को अक्षय को ईला हेलेना पुत्रो के सुपुर्द किया है।

भारत की सभ्यता और संस्कृति से है लगाव

फिनलैंड के हिलसिंकी निवासी ईवा हेलेना पुत्रो का बनारस से विशेष लगाव है। वह इसके पहले वर्ष 1995 और वर्ष 2005 में भारत भ्रमण करने आई थी। दोनों ही बार वह बनारस गई थी। जहां की संस्कृति उन्हे बहुत पसंद आई। ईवा हेलेना कहती हैं, भारत भूमि से उन्हे विशेष लगाव हो गया।

अपर कलेक्टर ने बच्चे को सौंपा

सोमवार को अपर कलेक्टर अर्पित वर्मा ने पूरी प्रक्रिया के बाद अक्षय को उसे गोद लेने वाली ईला हेलेना पुत्रो को सौंपा। इस दौरान उन्होने उनसे चर्चा की और बच्चे के पालन पोषण के संबंध में जानकारी ली। इस दौरान इला हैलेना पुत्रो के साथ दिल्ली से आए संजीव अरोड़ा, सहायक संचालक महिला एवं बाल विकास विभाग अखिलेश मिश्रा, अध्यक्ष सद्गुुरु मिशन अनीता गुप्ता, सचिव सदगुरु मिशन संतोष शुक्ला, अधीक्षक शिशु शिवालय गृह बृजेंद्र दुबे सहित अन्य संबंधित लोग उपस्थित थे।

शादी नहीं करना चाहती इसलिए एडाप्ट किया बच्चा

फिनलैंड निवासी ईवा हेलेना पुत्रो ने अभी तक शादी नहीं की है। उनके साथ दिल्ली से आए संजीव अरोड़ा ने चर्चा के दौरान बताया कि ईवा हेलेना शादी नहीं करना चाहती है। इस वजह से उनके मन में बच्चा एडाप्ट करने की बात आई। वह भारत की संस्कृति से विशेष लगाव रखती है। जिस वजह से वह यहां के ही बच्चे को गोद लेना चाहती थी। इसी वजह से उन्होने भारत के के बच्चे को ही एडाप्ट करने का मन बनाया।

शिवालय शिशु गृह से विदेश जा रहा अक्षय 14 माह पहले उमरिया जिले के नौरोजाबाद में नाली के किनारे मिला था। उस वक्त वह महज 1 दिन का था। उपचार के बाद उसे बाल कल्याण समिति उमरिया भेजा गया था। जहां से दूसरे दिन उसे शहडोल स्थित शिवालय शिशु गृह भेज दिया गया। जहां प्रबंधन ने 14 माह तक उसका पालन-पोषण किया और अब वह विदेश जा रहा है। जहां उसकी बेहतर परवरिश हो सकेगी।

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