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नहीं मिला धान का पैसा, किसी ने बेटी की शादी आगे बढ़ाई तो कोई इलाज के लिए देख रहा राह

जिले में 10999 किसानों को नहीं हो सका भुगतान, समिति व ट्रांसपोर्टर का पैसा भी अटका

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जिले में 10999 किसानों को नहीं हो सका भुगतान, समिति व ट्रांसपोर्टर का पैसा भी अटका
शहडोल. धान खरीदी के बाद अब भुगतान के लिए किसानों को मशक्कत करनी पड़ रही है। खरीदी समाप्त होने के 17 दिन बाद भी किसानों को अपनी मेहनत की कमाई का इंतजार है। किसानों को खाते में पैसा नहीं आने पर कई तरह की परेशानियों को सामना करना पड़ रहा है। किसी को अपनी बेटी की शादी आगे बढ़ाना पड़ रहा तो किसी किसान के पास पैसे की कमी होने के कारण पत्नी व पिता के इलाज में समस्या हो रही है।
अधिकांश किसान खेती के लिए पूर्व से लिए हुए कर्ज को चुकाने के लिए परेशान हो रहे हैं। इतना ही नहीं किसान के साथ-साथ ट्रांसपोर्टर व समिति संचालक का भी लाखों रुपए का भुगतान अटका हुआ है। किसानों की माने तो इसके पहले कभी भी भुगतान में इतनी समस्या नहीं हुई। उपज बेचने के एक सप्ताह के भीतर खाते में पैसा आ जाता था, इस बार भुगतान में समस्या हो रही है। इसका कारण न तो उपार्जन क्रेन्द्र प्रभारी बता पा रहे और ना ही अधिकारियों को कुछ जानकारी है।
रोजाना बन रही विवाद की स्थिति
समिति संचालकों की माने तो धान परिवहन के लिए उन्होंने खुद किराए पर वाहनों को लगाया था, जिसका भुगतान 45 रुपए क्विंटल किया जाना था। कई समितियों ने उपार्जन के अनुसार वाहनों को भाड़े में ले रखा था, अब समय पर भुगतान नहीं होने पर वाहन मालिक के साथ विवाद की स्थिति निर्मित हो रही है। समितियों की माने तो अब तक एक रुपए का भुगतान नहीं किया गया है, और कब तक भुगतान होगा इसकी जानकारी भी किसी के पास नहीं है।
एनसीसीएफ की लापरवाही आई सामने
जानकारी के अनुसार इस वर्ष धान उपार्जन की जिम्मेदारी एनसीसीएफ को सौंपी गई थी। इसके जिम्मेदारों ने धान खरीदी से लेकर परिवहन और भुगतान तक लापरवाही बरती है। यही कारण है कि खरीदी समाप्त होने के 17 दिन बाद भी करीब 1 लाख क्विंटल से अधिक धान अब भी खुले में पड़ी हुई है, ट्रांसपोर्टरों व समितियों ने भुगतान नहीं होने के कारण हाथ खड़े कर दिए हैं। इतना ही नहीं 10999 किसानों का 186.75 करोड़ का भुगतान होना शेष रह गया है। इसके साथ ही ट्रांसपोर्टर एवं समितियों का भी करोड़ों रुपए का भुगतान बाकी है। वहीं भुगतान से संबंधित जानकारी लेने पर एनसीसीएफ के जिम्मेदार कुछ भी कहने से बच रहे हैं।
आदिम जाति सेवा सहकारी समिति देवगांव से 15000 क्विंटल का धान परिवहन किराए के वाहनों से कराया गया है, जिसका भुगतान करीब 45 लाख रुपए बकाया है। शुरू से लेकर अभी तक एक भी रुपए का भुगतान नहीं किया गया है। वाहन चालकों से विवाद की स्थिति निर्मित होती है, काफी समस्या हो रही है।
धु्रव नारायाण शुक्ला, समिति संचालक देवगांव

सुखाड़ समिति के संचालक ने बताया कि समिति स्तर के 34 किसानों का भुगतान अटका हुआ है। 1.25 लाख क्विंटल धान का प्राइवेट वाहन लगाकर परिवहन कराया गया है, जिसका भुगतान करीब 40 लाख रुपए रुका हुआ है। इसके साथ ही पपौंध में भी परिवहन का भुगतान नहीं हुआ है।
बृजवासी तिवारी, समिति संचालक सुखाड़

100 क्विंटल धान की बिक्री की थी, जिसका भुगतान करीब 2.30 लाख रुपए अभी तक नहीं हुआ है। मार्च में बिटिया की शादी फिक्स थी, धान का भुगतान नहीं होने से अब मई जून तक बढ़ा दिए हैं। इसके अलावा अन्य कई कार्य प्रभावित हो रहे हैं। बीते वर्ष एक सप्ताह में भुगतान हो गया था।
भोलेराम पटेल, किसान

पत्नी को लकवा लग गया है पिता पहले से बीमार चल रहे हैं। सोचा था, समय पर धान का भुगतान हो जाएगा तो पत्नी को नागपुर इलाज के लिए ले जाऊंगा, दो महीने से 82 हजार रुपए धान का भुगतान अटका है। अब तक कर्ज लेकर काम चलाया अब कोई कर्ज भी देने को तैयार नहीं है।
राजेन्द्र कुशवाह, किसान छतवई

कोई कुछ बताने को तैयार नहीं है कि किसानों का भुगतान क्यों नहीं हो रहा है। 23 दिसम्बर को 214 क्विंटल धान विक्रय किया था, जिसका भुगतान 5.45 लाख रुपए से अधिक बकाया है, पैसे नहीं होने से गेहूं की खेती भी पिछड़ रही है। जबकि गत वर्ष का भुगतान एक सप्ताह में हो गया था।
शरणजीत ङ्क्षसह, किसान पचगांव

इस सीजन में 117 क्विंटल धान बेचा था, जिसका भुगतान 2.79 लाख रुपए बाकी है। दो महीने बीत रहे अभी तक खाते में पैसा नहीं आया है। घर बनाने के लिए भी उधारी सामान खरीद लिया था, लेकिन समय पर भुगतान नहीं होने के कारण अब व्यापारी फोन कर परेशान करना शुरू कर दिए हैं।
बृजकिशोर जायसवाल, किसान

कंपनी के साथ अनुबंध करने के बाद धान का परिवहन शुरू किया था, 1.50 करोड़ के भुगतान में सिर्फ 60 लाख रुपए ही प्राप्त हुआ है। पैसा नहीं मिलने के कारण समस्या हो रही है। इसी प्रकार अन्य पांच ट्रांसपोर्टरों का भुगतान भी फंस गया है। अधिकारी कुछ बताने को तैयार नहीं है।
मो. जकरिया, परिवहनकर्ता