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डॉक्टर्स, नर्स और स्वास्थ्यकर्मी हड़ताल पर, लडख़ड़ाई स्वास्थ्य व्यवस्थाएं

एसएनसीयू और एनआरसी में डॉक्टर्स नहीं, गांवों में टीकाकरण हो रहा प्रभावित, नियमितीकरण को लेकर संविदा स्वास्थ्यकर्मी कर रहे हैं हड़ताल
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जिले के 320 कर्मचारी हड़ताल पर, मैदानी कर्मचारियों से लडख़ड़ाई व्यवस्थाएं
शहडोल। संविदा स्वास्थ्यकर्मियों की हड़ताल के चलते जिले में स्वास्थ्य सुविधाएं लडख़ड़ा गई हैं। नियमितीकरण की नीति को लागू करने की मांग को लेकर संविदा स्वास्थ्यकर्मी पिछले १९ फरवरी से अपनी हड़ताल कर रहे हैं। इसमें डॉक्टर्स, स्टॉफ नर्स, एएनएम, फार्मासिस्ट सहित डीपीएम और कई अधिकारी कर्मचारी शामिल हैं। अचानक संविदा स्वास्थ्यकर्मियों के हड़ताल पर जाने से स्वास्थ्य व्यवस्थाओं पर व्यापक असर पड़ रहा है। हालांकि स्वास्थ्य विभाग ने वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर कुछ स्थाई स्वास्थ्यकर्मियों की ड्यूटी लगा रखी हैं। इसके बाद भी मरीज और परिजनों को भटकना पड़ रहा है। अध्यक्ष रामगोपाल गुप्ता ने बताया कि संविदा कर्मचारियों को नियमित करने संविलियन नीति लागू करने का वादा किया था लेकिन पूरा नहीं हुआ। इसी तरह 1900 से ज्यादा संविदा पदों को खत्म करते हुए संविदा कर्मचारियों का पद जबरन समाप्त कर दिया गया है। इसको लेकर आंदोलन किया जा रहा है।
हड़ताल पर एसएनसीयू का पूरा स्टॉफ
एसएनसीयू में पूरा स्टॉफ संविदा कर्मचारी था। हड़ताल पर जाने से पूरा एसएनसीयू खाली हो गया है। इसके अलावा डीआईसी का पूरे कर्मचारी हड़ताल पर हैं। इसके चलते स्वास्थ्य व्यवस्थाएं पटरी से उतर रही हैं और लोगों को दिक्कतें हो रही हैं।
हड़ताल से इन पर बड़ा असर
- एसएनसीयू का पूरा स्टॉफ हड़ताल में हैं, इससे व्यवस्थाएं लडख़ड़ाई हैं।
- एसएनसीयू में वैकल्पिक व्यवस्था की हैं लेकिन अप्रशिक्षितकर्मियों हैं।
- आरबीएसके कर्मी भी हड़ताल पर होने से गांवों में सेवाएं बदहाल हैं।
- मैदानी कर्मचारियों की हड़ताल होने से टीकाकरण में बड़ा असर पड़ रहा है।
- एकाउंटेंट न होने से जननी सुरक्षा, परिवार कल्याण भुगतान नहीं हो रहा है।
- गांवों के डिलेवरी प्वाइंट बंद हो गए हैं, जिससे दिक्कतें हो रही हैं।
- टीबी रोग के मरीजों को भी स्वास्थ्यकर्मी और स्टॉफ नहीं मिल पा रहा है।
- अधिकांश मैदानी कर्मचारी हड़ताल पर होने से गांवों में दिक्कतें हो रही हैं।

वैकल्पिक व्यवस्था कर ले रहे सेवाएं
संविदा कर्मचारियों के हड़ताल में जाने से असर पड़ रहा है। हालांकि हमने वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर ड्यूटी लगाई है। एसएनसीयू सहित संवेदनशील जगहों में फोकस किया है। अन्य कर्मचारियों का अवकाश अस्वीकृत कर दिया है।
डॉ राजेश पांडेय, सीएमएचओ शहडोल