
कनिष्ठ अभियंता के खिलाफ लामबंद हुआ कर्मचारी संगठन
शहडोल। विद्युत विभाग के धनपुरी कनिष्ठ अभियंता सुखबदन विश्वकर्मा पर लगे कई गंभीर आरोपों के बाद अब कर्मचारी संगठन लामबंद हो गया है। वरिष्ठ अधिकारियों को पत्र लिखकर आरोपी अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है। उक्त कनिष्ठ अभियंता पर करंट से घायल कर्मचारी को सहायता राशि न दिलवाने, कर्मचारियों से गाली-गलौंच करने और अपने ही कर्मचारियों के साथ मारपीट करवाने की साजिश के कई गंभीर आरोप लगे हैं।
विजली कर्मचारी जनता यूनियन क्षेत्रीय सचिव एसके तिवारी, प्रांतीय सचिव जेपीएन शर्मा, केडी द्विवेदी द्वारा वरिष्ठ अधिकारियेां को शिकायत की गई है कि धनपुरी वितरण केंद्र में कनिष्ठ अभियंता के पद पर पदस्थ सुखबदन विश्वकर्मा विद्युत कर्मचारियों से अभद्रता करते हैं, उनके खिलाफ गंभीर साजिशें की जा रहीं हैं। 30 जून को बुढ़ार-धनपुरी के बीच लाइट सुधारने गया कर्मचारी तुलसी यादव करंट की चपेट में आ गया था, करंट लगने के बाद खंभे से गिरकर वह बुरी तरह घायल हुआ। रीड की हड्डी टूट गई, लेकिन कनिष्ट अभियंता ने इसकी जानकारी वरिष्ठ अधिकारियों को नहीं दी और न ही घायल कर्मचारी का सहयोग किया। आर्थिक रुप से कमजोर कर्मचारी जिंदगी और मौत के बीच झूल रहा है। जबकि विभाग में उपचार हेतु अग्रिम राशि देने का प्रावधान है। इसके अलावा खैरहा में कार्यरत अपने ही कर्मचारी लक्ष्मण सेन हेल्पर को साजिश के तहत उपभोक्ताओं से पिटवानें, परीक्षण सहायक सुशील कुमार जैन के साथ गाली-गलौंच करने जैसे कई गंभीर आरोप लगाए गए हैं। कर्मचारी संगठन ने आरोपी कनिष्ठ अभियंता पर जल्द से जल्द कार्रवाई की मांग की है।
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सीएम हेल्पलाइन की फर्जी शिकायतों से परेशान अधिकारी-कर्मचारी
शहडोल। इन दिनों सभी विभाग यदि किसी से परेशान हैं तो सीएम हेल्पलाइन की शिकायतों से। एक बार शिकायत सीएम हेल्पाइन के पोर्टल पर दर्ज हो गई तो उसे पोर्टल से हटाने में विभागीय अधिकारियों को पसीना आ जाता है। निराकरण न होने पर शिकायत एल वन से लेकर एल 4 तक पहुंच जाती है। अधिकांश मामलों में सीएम हेल्पलाइन की शिकायतें आम व गरीब मजबूर लोगों के लिए एक हथियार का कार्य कर रहीं हैं, लेकिन कुछ मामलों में इसका दुऊपयोग भी हो रहा है। जीएसटी विभाग में भी अधिकारी-कर्मचारी ऐसी ही शिकायतों से परेशान हैं। विभागीय अधिकारियों की माने तो हालहि में विभाग में शिकायतों पर जांच के आदेश आए। अधिकारी जांच करने मौके पर पहुंचे तो शिकायत कर्ता का पता ही सही नहीं मिला। अधिकारी शिकायत कर्ता को खोजते रहे लेकिन शिकायत कर्ता सामने ही नहीं आया। वहीं दूसरी शिकायत में जिला पंचायत और जनपद के मामले को जीएसटी विभाग को सौंपा गया। शिकायत का निराकरण बार-बार जाने के बाद भी नहीं हुआ और मामला एक स्टेज से लेकर दूसरी, तीसरी और चौथी स्टेज में पहुंच गया, अब अधिकारियों को जबाब देते नहीं बन रहा है।
Published on:
05 Jul 2018 08:44 pm
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