
गायत्री जयंती में इस मुहूर्त में करें पूजा, होगा विशेष फलदायी
शहडोल- 24 मई गुरुवार को गायत्री जयंती और गंगा दशहरा एक साथ है, ऐसे में इस दिन का महत्व बहुत बढ़ जाता है, इस दिन विशेष पूजा पाठ और आराधना करने से इसके बहुत फायदे मिलते हैं। गायत्री
जयंती, गायत्री देवी जिन्हें वेद माता भी कहते हैं उनकी याद में मनाया जाता है। इन्हें सभी वेद की माता, देव माता, विश्व माता भी कहते हैं। चारों वेद, शास्त्र और श्रुतियां सभी गायत्री से ही पैदा हुए माने जाते हैं, वेदों की उत्पत्ति के कारण इन्हें वेदमाता भी कहा जाता है, ब्रम्हा, विष्णु, और महेश तीनों ही देवताओं की आराध्य भी इन्हें माना जाता है। इसलिए इन्हें देवमाता भी कहा जाता है।
गायत्री जयंती शुभ मुहूर्त
गायत्री जयंती गुरुवार को है, और इस दिन विशेष मुहूर्त में पूजा पाठ करने से इसके बहुत फायदे मिलते हैं। पंडित एवं ज्योतिष आचार्य राकेश शास्त्री के मुताबिक इस बार गायत्री जयंती के लिए शुभ मुहूर्त ब्रम्ह मुहूर्त से शुरू होकर सुबह 6.52 तक विशेष मुहूर्त है या कहें उत्तम मुहूर्त है। इस मुहूर्त में गायत्री जी की उपासना करना विशेष फलदायी होता है।
इस मुहूर्त में पूजा करने के फायदे
ऐसा माना जाता है कि इस मुहूर्त में गायत्री जी की उपासना करने, पूजा पाठ करने से पाप कर्म कम होते हैं, और व्यक्ति का मन पुण्य कर्म करने की ओर ज्यादा लगता है। या यूं कहें कि माता उसे सही दिशा की ओर ले जाती हैं।
गायत्री मंत्र है लाभकारी
गायत्री मंत्र का जाप करने या सुनने के अपने ही फायदे हैं, पंडितों के मुताबिक अगर दिन में तीन बार गायत्री मंत्र का जाप करें, या सुनें तो उसके कई फायदे होते हैं, ऐसा माना जाता है कि इस मंत्र के जाप या सुनने मात्र से ही इंसान कभी भी दुखी नहीं रहता, और ना ही कभी उसके जीवन में कठिनाई आती है। जो भी व्यक्ति इस मंत्र को बोलता या सुनता है उसका जीवन सफल हो जाता है। ज्योतिषियों के मुताबिक अगर कोई व्यक्ति दिन में गायत्री मंत्र का 24 माला जाप कर ले, तो उससे फलदायी कुछ हो ही नहीं सकता। अगर कोई 24 माला जाप नहीं कर सकता तो 11 माला, या 5 माला जाप भी कर सकता है।
गायत्री जयंती गंगा दशहरा एक साथ
24 मई गुरुवार को गंगा दशहरा और गायत्री जयंती एक साथ है इसलिए इसका योग भी बेहतर बन रहा है। क्योंकि इस शुभ मुहूर्त में उपासना करने से पाप कर्म क्षीण होता है। गंगादशहरा के दिन सुबह-सुबह गंगा जी में स्नान करके दान पुण्य को फलदायी माना जाता है। अगर गंगा जी में स्नान नहीं कर सकते, दूर हैं तो कहीं भी नदी में स्नान करके दान पुण्य करने से विशेष लाभ होता है।
Published on:
23 May 2018 07:23 pm
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