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परिवार को संवारने में महती भूमिका निभा रहे हैं दादा-दादी

ग्रेंड पेरेंट्स-डे पर विशेष-जिंदगी की बगिया के बागवां होते है दादा-दादी, नातियों की रहती हैं ज्यादा फिक्र

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Grandparents are playing an important role in grooming the family

Grandparents are playing an important role in grooming the family

शहडोल. हर घरों में रिश्ते सभी को बांधे रखते हैं, लोगों को जीवन के सही पथ से भटकने नहीं देते। घर में माता-पिता का प्यार वो अहसास होता है, जो बच्चों के जीवन को संवारता है, लेकिन बच्चों को संवारने वालों में शिखर पर होते हैं उनके ग्रेंड पेरेंट्स यानि दादा-दादी या नाना-नानी। दादा-दादी या नाना-नानी रिश्तों की बगिया के वे बागवां होते हैं, जो हर दिन अपने परिवार को सहेजते हैं। आज का दिन दुनिया में ग्रेंड पेरेंट्स-डे के रूप में मनाया जाता है, ऐसे में आज हम आपको रूबरू करा रहे हैं, शहर के सेवानिवृत्त 77 वर्षीय पुरूषोत्तम दास असाटी के परिवार से, जिनके सात नातियों को अपने दादा और दादी विमला असाटी से इतना ज्यादा लगाव है कि वह उनसे पूछे बगैर कोई कार्य नहीं करते। दादा-दादी को भी अपने नातियों की ज्यादा फिक्र रहती है और वह सुबह सो कर उठने से लेकर रात सोने तक उनकी हर जरूरत का ख्याल रखते हैं। इस घर में बच्चों का दादा-दादी से अलग ही लगाव है। जब कभी कहानियां सुनने का मन होता है, तो बच्चों को दादी की ही याद आती है और पापा के गुस्से से बचने के लिए बच्चे दादाजी के पीछे बच्चे छुप जाते हैं। इनके नाती 16 वर्षीय स्नेहा असाटी, 13 वर्षीय आर्या असाटी, आठ वर्षीय आर्यन असाटी, 12 वर्षीय भाव्या असाटी, छह वर्षीय नव्या असाटी और 11 वर्षीय बेटू असाटी व पांच वर्षीय कृष्णा असाटी है। सही मायनों में देखा जाए तो बुजुर्ग ही घर की शान होते हैं।

स्नेहा असाटी का कहना है कि वे अपने दादा-दादी के बहुत करीब हैं कोई भी काम होता है तो वह उनके पास ही बैठकर करती है। यहां तक कि दादी की बताई हुई बातों को हमेशा मानती हैं।

भाव्या असाटी का कहना है कि वे घर में जब भी आती हैं, तो दादा-दादी के साथ ही बैठना बहुत अच्छा लगता है। आज भी पापा अगर गुस्सा हों, तो दादाजी ही आकर उन्हे समझाते हैं।