
पेड़ के नीचे बांस में दबी मिली थी मूर्ति, अब चंडी माता के नाम से विख्यात
शहडोल/बाणसागर. बाणसागर के रीवा-शहडोल मार्ग के बगल में लगभग १९५८ में एक बांस के नीचे माता की मूर्ति मिली थी। यहां पर लोगों का आना-जाना कम था। इसी दौरान रीवा के एक ठेकेदार ने निर्माण कार्यों के दौरान एक मन्नत मांगी थी। मन्नत पूरी होते ही उन्होंने एक छोटा से चंडी माता का मंदिर बनवा दिया। इसके बाद आस-पास के लोग चंडी माता के मंदिर में आने लगे। इस दौरान जब लोगों की मनौती पूरी होने लगी तो लोग आगे आकर मंदिर में दान करने लगे। धीरे-धीरे लोगों ने वहां पर एक बड़ा मंदिर बनवा दिया। लोग अपनी मन्नत को पूरा करने मंदिर में नारियल बांधते हैं। यहां पर हजारों की संख्या में नारियल बंधे हुए हैं। इस मार्ग से जो भी गाडिय़ा गुजरती है तो उसका चालक गाड़ी को रोककर मंदिर में दर्शन करने जरूरत पहुंचता है। चंडी माता के नाम से मंदिर पहचाना जाता है। मनौती पूरा होने से इस क्षेत्र के लोगों का चंडी माता पर अटूट विश्वास है। यहां पर लोग मानस, कथा आदि करवाते रहते हैं। चंडी माता की प्रसिद्धि बढऩे पर धीरे-धीरे शहडोल के साथ आस-पास के जिलों के लोग भी अपनी मन्नत मांगने पहुंचने लगे हैं। रीवा, शहडोल, सतना, कटनी, जबलपुर तक से लोग चंडी माता के दर्शन करने आते हैं और अपनी मन्नत मांगते हैं। यहां के पुजारी पं रामसुहावन शास्त्री ने बताया कि आस-पास के लोगों ने अपनी मन्नत पूरा होने पर मंदिर को बड़ा बनवाया है। यहां हर समय लोग पूजा-पाठ करते रहते हैं। मां भी उनकी हर मन्नत पूरा करती है। मूर्ति पुरातात्विक है।
Published on:
29 Jan 2021 11:48 am
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