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सर्द-गर्म की लुकाछिपी ने बिगाड़ी सेहत, अस्पतालों में बढ़ी मासूमों की कतार

एक सप्ताह में 4500 से अधिक मरीज पहुंचे, सर्दी जुखाम का बढ़ा प्रकोपशहडोल. जिले में बीते एक सप्ताह से मौसम के मिजाज में आ रहे उतार-चढ़ाव ने आम जनजीवन के साथ-साथ लोगों की सेहत पर गहरा असर डालना शुरू कर दिया है। दिन में तेज धूप और रात में ठंडक के कारण सर्द-गर्म की स्थिति […]

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एक सप्ताह में 4500 से अधिक मरीज पहुंचे, सर्दी जुखाम का बढ़ा प्रकोप
शहडोल.
जिले में बीते एक सप्ताह से मौसम के मिजाज में आ रहे उतार-चढ़ाव ने आम जनजीवन के साथ-साथ लोगों की सेहत पर गहरा असर डालना शुरू कर दिया है। दिन में तेज धूप और रात में ठंडक के कारण सर्द-गर्म की स्थिति बन रही है, जिसका सबसे ज्यादा असर बच्चों में पड़ रहा है। जिले के स्वास्थ्य केन्द्रों और अस्पतालों में अचानक मरीजों की संख्या में बढोतरी देखी जा रही है। जिला अस्पताल सहित मेडिकल कॉलेज में हर दिन बड़ी संख्या में मरीज पहुंच रहे हैं।

अस्पतालों में बढ़ा दबाव

बदलते मौसम के कारण जिला अस्पताल की ओपीडी में मरीजों का दबाव काफी बढ़ गया है। आंकड़ों पर नजर डालें तो बीते एक सप्ताह के भीतर 4500 से अधिक मरीज अपना इलाज कराने अस्पताल पहुंचे हैं। इसमें से 436 सिर्फ बच्चे शामिल हैं, जो सर्दी, जुखाम, तेज बुखार और पेट दर्द जैसी समस्याओं से ग्रसित हैं। यही कमोबेश स्थिति शहडोल मेडिकल कॉलेज की भी है, जहां शिशु रोग विभाग में प्रतिदिन 30-40 बच्चे वायरल संक्रमण की शिकायत लेकर पहुंच रहे हैं।

सर्द-गर्म से बढ़ रही समस्या

जिले में वर्तमान में तापमान स्थिर नहीं है। सुबह और शाम के समय ठंडी हवाएं चलती हैं, जबकि दोपहर में सूरज की तपिश लोगों को परेशान कर रही है। मौसम का यह दोहरा व्यवहार शरीर की प्रतिरोधक क्षमता (इम्यूनिटी) पर सीधा प्रहार कर रहा है। डॉक्टरों के अनुसार, अचानक तापमान बदलने से शरीर खुद को ढाल नहीं पाता, जिससे वायरल लोड बढ़ जाता है और लोग संक्रमण की चपेट में आ जाते हैं।

सावधानी ही बचाव

मेडिकल कॉलेज के शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. निशांत प्रभाकर ने बताया कि वर्तमान में सर्द-गर्म की स्थिति के कारण बच्चों में वायरल इंफेक्शन तेजी से फैल रहा है। बच्चों को सर्दी-जुखाम के साथ बुखार और खासकर पेट दर्द की शिकायतें आ रही हैं। अभिभावकों को सलाह है कि वे बच्चों के खान-पान और पहनावे पर विशेष ध्यान दें। दोपहर की धूप से आने के तुरंत बाद बच्चों को ठंडा पानी या फ्रिज की चीजें न दें। बाहर के खुले खाद्य पदार्थों और बासी भोजन से परहेज करें। बच्चों को हल्का और सुपाच्य भोजन दें। शरीर में पानी की कमी न होने दें। बच्चों को पर्याप्त मात्रा में गुनगुना या सामान्य पानी पिलाते रहें। सुबह-शाम की ठंड को देखते हुए बच्चों को पूरी आस्तीन के कपड़े पहनाएं। एकदम से गर्म कपड़े उतारने में जल्दबाजी न करें। तेज बुखार या पेट दर्द है, तो घरेलू उपचार के भरोसे न रहें। तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र या विशेषज्ञ से संपर्क करें। रात में सोते समय मच्छरदानी का प्रयोग करें।