
miracle baby boy
शहडोल। जिला अस्पताल में डॉक्टरों की टीम ने बड़ा इलाज करते हुए दो मासूमों को नई जिंदगी दी है। डेंजर जोन से भी ज्यादा पीलिया का स्तर पहुंचने के बाद दोनों बच्चों की सांस और दिल की धड़कन थम गई थी। डॉक्टरों की टीम ने मशक्कत के बाद दोनों बच्चों को 30- 30 इंजेक्शन के माध्यम से बूंद- बूंद खून बदला। इंजेक्शन के माध्यम से दूषित खून बदलते हुए नया खून लगाया। अब दोनों बच्चों की हालत खतरे से बाहर है। एसएनसीयू के डॉ सुनील हथगेल के अनुसार, अगसिया बाई का दो दिन का बच्चा एसएनसीयू में भर्ती किया गया था। उस वक्त उसकी सांसे और दिल की धड़कन दोनों थमी हुई थी। सीपीआर करके उसे पहले पुनर्जीवन दिया गया उसके बाद पीलिया दूर करने ऑपरेशन शुरू किया। इसी तरह एक अन्य बच्चे का भी खून बदलकर इलाज किया गया। दो दिन के बच्चे का पूरा शरीर हल्दी जैसा पीला था। जिसकी जांच में 29 मिली ग्राम पीलिया था। बच्चेे को बचाना मुश्किल था। दोनों बच्चों का बूंद बूंद खून बदलकर जान बचाई।
पैदा होते तोड़ देते थे दम, दो की हो चुकी है मौत
अगसिया के अनुसार, उसके बच्चे पैदा होते ही पीलिया से खत्म हो जाते थे। दो बच्चे पहले ही पैदा होते ही दम तोड़ चुके थे। तीसरे दिन पीलिया से खत्म हो जाते थे। यह उनका तीसरा बच्चा था। एसएनसीयू के डॉ सुनील हथगेल और पूरी टीम ने शेड्यूल के माध्यम से दोनों बच् चों को बचाया।
अपंगता का था खतरा, ब्लडबैंक भी बना वरदान
दोनों बच्चों को बचाने के लिए ओ नेगेटिव खून की जरूरत थी। डॉ सुनील हथगेल के अनुसार, इस तरह के बच्चे का बचना मुश्किल होता है और अगर पीलिया दिमाग में चल जाता है तो जीवन भर के लिए शारीरिक एवं मानसिक अपंगता हो सकती थी। बच्चे को करनिकटेरस बीमारी हो जाती है। डॉ हथगेल ने ब्लड बैंक प्रभारी डॉ सुधा नामदेव को जानकारी दी। ब्लड बैंक प्रबंधन ने तत्काल बच्चों के लिए खून उपलब्ध कराया।डॉ हथगेल के अनुसार, हर ऑपरेशन में दो से ढाई घंटे तक खून बदलकर जान बचाई गई।
Updated on:
14 May 2019 12:37 pm
Published on:
14 May 2019 12:33 pm
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