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मप्र का एक ऐसा गांव, जहां नहीं है एक भी पीएम मोदी का आवास, घास फूस की झोपड़ी में 473 आदिवासियों की जिंदगी

पहाड़ी में बसे ठुनगुनी गांव की हकीकत, न अफसरों ने ली सुध और न जनप्रतिनिधियों ने की पहल

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शुभम बघेल@ शहडोल.

अनूपपुर पुष्पराजगढ़ के पहाड़ी में बसे गांव ठुनगुनी में आदिवासी परिवार पिछले कई दशकों से घास फूस से तैयार की गई झोपड़ी में जिंदगी गुजारने के लिए मजबूर हैं। हर गरीब को खुद के घर का सपना दिखाने वाली पीएम मोदी की आवास योजना की मैदानी हकीकत ठुनगुनी गांव बयां कर रहा है। धुराधर ग्राम पंचायत के अंतर्गत आने वाले इस ठुनगुनी गांव में एक भी पीएम आवास नहीं बना है। स्थिति यह है कि पिछले कई दशकों से साढ़े चार सैकड़ा से ज्यादा आदिवासी लोग घास फूस से झोपड़ी तैयार करके गुजर बसर करने के लिए मजबूर हैं। ग्रामीण पिछले काफी सालों से पीएम आवास के लिए दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं लेकिन अफसरों द्वारा पात्रता न होने की बात कहकर वापस लौटा दिया जाता है। गांव में एक सैकड़ा से ज्यादा परिवारों में ४७३ जनसंख्या है। इसके साथ ही २८५ मतदाता भी है। बेघर ग्रामीणों की समस्या को लेकर न तो अफसरों ने कभी कोई सुध ली और न ही किसी जनप्रतिनिधियों ने पहल की।
पेड़ों की ओट में दिन और झोपड़ी में गुजारते हैं रात
पीएम आवास न बनने से ग्रामीणों ने खुद से झोपड़ी तैयार करके रखी है। गांव में कई दशक गुजारने वाले ग्रामीण बुद्धा का कहना है कि अफसरों के पास जाते हैं लेकिन कोई जवाब नहीं मिलता है। इसलिए अब पीएम आवास का सपना ही छोड़ दिया है। झोपड़ी में भी गुजर बसर करना मुश्किल हो जाता है। इसके चलते दिन में पेड़ों की ओट का सहारा लेते हैं और रात झोपड़ी में ही गुजारते हैं। ग्रामीण बुद्धा बताते हैं कि खुद के हाथ से मकान तैयार किया है। गांव में ऐसे कई परिवार हैं, जो खुद से झोपड़ी तैयार कर जिंदगी गुजार रहे हैं।
नेता कहते हैं मिलेगा घर, अफसर कहते हैं पात्रता नहीं
ग्रामीण विश्वनाथ सिंह, उदय सिंह, रामकुमार और चरण सिंह ने बताया कि कई बार पीएम आवास को लेकर अधिकारियों से लेकर नेताओं के यहां चक्कर लगाए लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला। ग्रामीणों के अनुसार, नेता आते थे कहते थे पीएम आवास मिलेगा और आश्वासन देकर चले जाते थे। उधर अफसर कहते थे पात्रता सूची में नाम ही नहीं है। ग्रामीण कहते हैं, खुद के घर के लिए पीएम आवास का सपना देखना ही छोड़ दिए हैं।
अधिकारी बोले, डाटा मैच नहीं इसलिए कई गांव छूटे
सरकारी मशीनरी की अनदेखी का खामियाजा आदिवासी ग्रामीणों को भुगतना पड़ रहा है। सीईओ पुष्पराजगढ़ रणजीत सिंह रघुवंशी का कहना है कि सर्वे में कई डाटा का मिलान नहीं हो पाया है। जिसके चलते कई गांवों में पीएम आवास नहीं बना है। सीईओ जनपद पंचायत भी स्वीकार रहे हैं कि पुष्पराजगढ़ ब्लॉक के लगभग एक दर्जन गांवों में पीएम आवास नहीं बना है। सीईओ का कहना है कि २०११-१२ में सर्वे कराया गया था। इसी के आधार पर पीएम आवास की पात्रता सूची तैयार की गई थी। सर्वर में डाटा न मिलने की वजह से लगभग १२ गांव ऐसे हैं, जहां पीएम आवास नहीं बना है। ठुनगुनी गांव को लेकर अधिकारियों से चर्चा की जाएगी कि किन कारणों से यहां पीएम आवास स्वीकृत नहीं हुए हैं।

उम्मीद ही छोड़ दी
पीएम आवास के लिए कई सालों से आश्वासन मिल रहा है। उम्मीद ही छोड़ दी कि खुद का पक्का मकान होगा।
मान सिंह, ग्रामीण ठुनगुनी

पीएम आवास नहीं, झोपड़ी में रहने मजबूर
गांव में पीएम आवास नहीं है। अधिकारी कहते हैं पात्रता सूची में नाम नहीं है।ग्रामीण झोपड़ी में रहने मजबूर हैं।
मनी राम, ग्रामीण ठुनगुनी


जनपद पंचायत की पीएम आवास की पात्रता सूची में ठुनगुनी गांव के ग्रामीणों का नाम नहीं है। इसके चलते पीएम आवास नहीं मिल पाया है। अधिकारियों को पहले बताया जा चुका है।
चैन सिंह, रोजगार सहायक
ठुनगुनी, ग्राम पंचायत धुराधर