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रेल यात्रियों की सुविधाओं की जरा भी फिकर नहीं, कोयला रैक की ज्यादा निकासी जरूरी

बिजली घरों तक पहुचाना है, कोयला इसलिए रद्द और लेट कर रहे यात्री ट्रेनें

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Not a bit of the amenities of rail passengers, Excessive clearance of coal racks

Not a bit of the amenities of rail passengers, Excessive clearance of coal racks

शहडोल. बिलासपुर-कटनी सेक्शन में पिछले छह महीने से सफर के दौरान यात्रियों को काफी परेशानी हो रही है, क्योंकि आए दिन कोई न कोई ट्रेन लेट रहती है और हर दूसरे-चौथे दिन कोई न कोई ट्रेन को कैङ्क्षसल कर दिया जाता है। यात्री जब अपनी यात्रा के लिए रेलवे स्टेशन पहुंचता है तो उसे या तो ट्रेन के लेट होने की या फिर ट्रेन के कैंसिल होने की खबर मिलती है। ऐसी स्थिति में वह उहापोह की स्थित में आ जाता है। उसे कुछ नहीं सूझता कि आखिर वह करें तो क्या करेïïïï?ट्रेनों के कैंसिल होने या लेट होने के बारे जब पत्रिका ने पड़ताल की तो काफी आश्चर्यजनक तथ्य उभर कर सामने आए हैं। पता चला है कि राजस्थान सहित अन्य कई विद्युत घरों में कोयला पहुंचाने के लिए यात्री ट्रेनों को लेट व कैंसिल किया जा रहा है। जिसके लिए रेल प्रशासन पहले तो मेगा ब्लाक व आवश्यक रख-रखाव के नाम पर यात्री ट्रेनों के रद्द व लेट करने की सूचना देता था और जब यात्रियों के विरोध के स्वर नहीं उभरे तो अब बेखौफ होकर अपरिहार्य कारण की सूचना देकर यात्री ट्रेनों को कैंसिल व लेट कर रहे है। यात्री टे्रनों को डिस्टर्ब करने का यह सिलसिला अभी रुकने का नाम ही नहीं ले रहा है।
परसा खदान ने बढ़ाई समस्या
पड़ताल में पता चला कि छत्तीसगढ़ के सूरजपुर अजनी के पास जब से कोयला की परसा खदान शुरू हुई है, तब से बिलासपुर-कटनी मार्ग के रेल यात्रियों की परेशानियां बढ़ गई है। यह खदान पिछले 1 मई से शुरू हुई है, जो प्रतिष्ठित व्यवसायी अडानी की बताई जा रही है और इसी खदान का कोयला राजस्थान विद्युत उत्पादन केन्द्र भेजा जा रहा है। जिसके लिए प्रतिदिन कोयले की दस से बारह रैक निकाली जा रही है और इसी वजह से यात्री ट्रेनों को भी डिस्टर्ब किया जा रहा है।
प्रतिदिन गुजरती हैं कोयले की 30-32 रैक
पता चला है कि बिलासपुर-कटनी रेलमार्ग से कोयले की 30 से 32रैक प्रतिदिन निकाली जा रही है। जिसमें सर्वाधिक 10 से 12 रैक परसा खदान की होती है। अमलाई साइडिंग से प्रतिदिन पांच से छह रैक, बुढ़ार सायडिंग से प्रतिदिन दो रैक और गोविन्दा कॉलरी से प्रतिदिन एक से ज्यादा रैक की निकासी होती है। इसके अलावा नौरोजाबाद, बिजुरी, राजनगर, चिरमिरी, न्यू पोनरी हिल, डोमन हिल, वैकुण्ठपुर, विश्रामपुर और कटोरा सायडिंग से कोयले की प्रतिदिन एक-एक रैक निकाली जा रही है।
कई महीनों से चल रही है चालाकी
अपरिहार्य कारण बताकर ट्रेनों को रद्द व आधे बीच में समाप्त करने की यह चालाकी रेलवे पिछले कई महीनों से कर रहा है। कुछ ट्रेनें 30 नवंबर से ही प्रभावित हो रही। हालांकि ट्रेनें अलग-अलग दिन में रद्द हो रही है। रेलवे का दावा है कि कुछ ट्रेनें ही प्रभावित हो रही है। अन्य ट्रेनों का इससे परिचालन जरा भी प्रभावित नहीं होगा। जिस समय में मालगाड़ी कोयला लेकर पावर प्लांट तक जाएगी, उसी समय की ट्रेनों को इससे प्रभावित किया गया है। इसलिए यात्रियों पर इसका कुछ खास प्रभाव नहीं पड़ेगा।
कोयला लदान में वृद्धि को लेकर बैठक भी हुई
पिछले दिनों कोयला लदान में वृद्धि को लेकर दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे जोनल सभाकक्ष में जीएम सुनील सिंह सोइन व एसईसीएल के सीएमडी एके पंडा के बीच एक बैठक हुई। बैठक की शुरुआत में मुख्य माल परिचालन प्रबंधक रथेन्द्र रमन ने पावर पाइंट प्रेजेंटेशन के जरिए कोयला लदान से जुडे मुद्दों को दिखाया। इसके बाद जीएम सोइन ने विगत कुछ समय से कोयले की पर्याप्त लदान नहीं होने के संबंध में सीएमडी पांडा के साथ चर्चा की। इस पर एसईसीएल के सीएमडी ने जनवरी तक कोयले की लदान में वृद्वि के लिए आश्वस्त किया।
इनका कहना है
यह रेलवे बोर्ड का आदेश है कि पॉवर प्लांट में कोयले की सप्लाई के लिए कुछ दिनों तक यात्री टे्रनों को रद्द या लेट किया जाए और कोयले की रैक निकाली जाए। यह केवल बिलासपुर-कटनी मार्ग पर ही नहीं बल्कि इंडिया के सभी रेलमार्ग पर हो रहा है। पावर प्लांट पर फे्रश कोरिडोर यानि कोयले का गलियारा बनाया जा रहा है।
अंबिकेश साहू, जनसंपर्क अधिकारी, दपूमरे, बिलासपुर

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