
भैंस को लेकर बवाल, भैंस के पीछे घंटों घूमती रही पुलिस और पब्लिक, अजब-गजब है पूरी कहानी
शहडोल- कभी-कभी कुछ घटनाएं ऐसी हो जाती हैं, जिसे देखने वाला भी बस देखते ही रह जाता है, और बस यही सोचते रह जाता है कि आखिर ये हो क्या रहा है। ये घटना भी पूरी तरह से एक भैंस पर केंन्द्रित है, घटना में शुरू से लेकर आखिरी तक भैंस का बहुत बड़ा रोल है। ये पूरा बवाल भी भैंस को लेकर ही है।
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'जिसकी लाठी, उसकी भैंस ये कहावत सैकड़ों बार सभी ने कही और सुनी होगी। लेकिन शहडोल में भैंस के मालिकाना विवाद का निपटारा इस पुरानी कहावत के अनुसार नहीं हो सका। जिसके बाद पुलिस और पंचायत ने इसके लिए एक नायाब फॉमूर्ला निकाला। ये फॉर्मूला भी अजब-गजब था।
पंचायत का फॉर्मूला था कि भैंस को चौराहे पर छोड़ा जाएगा, जिसके बाद भैंस अपनी मर्जी से जिस भी घर में जाना चाहे जा सकती है, और जिस घर में चली गई, वो भैंस उसी की हो जाएगी। इसको लेकर पूरे दिन काफी गहमागहमी रही। ये खबर आग की तरह आसपास के लोगों को पता चली तो भैंस को छोड़े जाने के समय इस वाकये को देखने के लिए वहां भीड़ इकट्ठी हो गई, ये देखने के लिए कि आखिर भैंस किसके घर जाती है।
यहां की है घटना
ये घटना है नगर के पुरानी बस्ती की जहां दो पक्ष एक भैंस पर अपना-अपना मालिकाना हक जता रहे थे। काफी विवाद के बाद भी ये तय नहीं हो पाया कि आखिर भैंस किसकी है तो मामला जनप्रतिनिधियों और पुलिस तक पहुंच गया। पुरानी बस्ती वार्ड नंबर ३७ निवासी ज्ञान यादव ने कहा कि उसकी भैंस लगभग पांच महीने पहले खो गई थी। इसकी शिकायत भी कोतवाली में दर्ज कराई गई थी। इसके बाद २९ मई को ज्ञान यादव को एक भैंस चरती हुई मिली तो उसने उसे बांध लिया।
इसी दौरान वार्ड नंबर 38 निवासी राजेश कुमार महरा उर्फ लल्लू महोबिया ने 29 मई को पुलिस में शिकायत दर्ज कराई कि उसकी भैंस गुम हो गई है और उसे ज्ञान यादव ने बांध रखा है। विवाद बढ़ गया। पुलिस ने काफी मशक्कत की। जब निपटारा नहीं हुआ तो जनप्रतिनिधियों, वकीलों और पुलिस की मौजूदगी में पंचायत बैठी। इसमें फैसला लिया गया कि भैंस शुक्रवार शाम को सिंदूरी चौराहे पर छोड़ी जाएगी। इसके बाद भैंस जिसके घर चली जाएगी, वह उसकी हो जाएगी।
ये मामला दिन भर चर्चा का विषय बना रहा। शुक्रवार शाम लगभग 6 बजे पुलिस और जनप्रतिनिधियों के सामने भैंस को चौराहे पर छोड़ा गया। भैंस को जैसे ही छोड़ा गया वो काफी टाइम तक किसी के घर में नहीं गई, और घूमती रही। और भैंस के पीछे-पीछे पुलिस और पब्लिक भी घूमती रही।
आलम ये था कि भैंस लगभग एक घंटे वापस नहीं आई। भैंस ने लोगों को काफी छकाया। और आखिर में लगभग एक घंटे बाद भैंस राजेश कुमार महरा के घर पहुंची। उसके बाद ही मामले का पटाक्षेप हो गया। इस दौरान लगभग 1 घंटे तक पुलिस भैंस के पीछे-पीछे चलती रही। मामले में पंचायत के दौरान सुबह से पार्षद वार्ड नंबर 38 इशहाक खान, अधिवक्ता राम सुशील राव, धर्मेन्द्र शुक्ला और एएसआई कामता प्रसाद पयासी सहित मुहल्ले के अन्य लोग भी वहीं मौजूद रहे।
Published on:
02 Jun 2018 01:06 pm

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