
जेलों में कैदी तैयार कर रहे खादी के वस्त्र, हथकरघा से बने वस्त्रों का पंचकल्याणक में उपयोग
शहडोल. अमरकंटक के पंचकल्याणक महोत्सव में मंशानुरूप स्वदेशी अपनाने पर भी जोर दिया जा रहा है। आचार्यश्री स्वदेशी उत्पादों के स्टाल लगाने पर जोर दे रहे हैं। सर्वोदय तीर्थ क्षेत्र में आयोजित पंचकल्याणक महोत्सव में इसका विशेष ध्यान रखा जा रहा है। कार्यक्रम स्थल पर स्वेदशी वस्त्रों के साथ ही अन्य उत्पादों के स्टॉल लगाए गए हैं। कार्यक्रम में भाग लेने वाले पात्रों के साथ ही अन्य श्रावक भी स्वदेशी वस्त्र ही पहन रहे हैं। पूजा, अर्चना सहित अन्य धार्मिक अनुष्ठान हथकरघा से बने वस्त्रों को धारण करके ही किया जा रहा है।
जगह-जगह स्थापित हो रहे उद्योग
महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने आचार्यश्री जहां-जहां पहुंच रहे हैं वहां हथकरघा उद्योग स्थापित करने पर जोर दे रहे हैं। इसके साथ ही देश के अलग-अलग जेलो में भी कैदियों को प्रशिक्षण देकर उनसे हथकरघा से स्वदेशी वस्त्र बनवाए जा रहे हैं। जेल में बने इन वस्त्रों को अलग-अलग जगह होने वाले आयोजनों में लगने वाले स्टॉल के माध्यम से विक्रय किया जा रहा है। संजीव जैन ने बताया कि आचार्यश्री के सानिध्य में जगह-जगह हथकरघा उद्योग स्थापित हो रहे हैं। डोंगरगढ़ व जबलपुर में चल चरखा संचालित हो रहा है। डिंडोरी जिले में भी हथकरघा का बड़ा उद्योग स्थापित है। इन हथकरघा उद्योगों के माध्यम से महिलाओं को सशक्त बनाने रोजगार के अवसर प्रदान करने के प्रयास किए जा रहे हैं। इससे महिलाएं आत्मनिर्भर बन रही हैं। जेलों में कैदी तैयार कर रहे वस्त्र
अलग-अलग जेलों में कैदी अहिंसक वस्त्र तैयार कर रहे हैं। जिसमें प्रमुख रूप से तिहाड़ जेल दिल्ली, केन्द्रीय जेल बनारस, आगरा, मिर्जापुर, सागर, शिवपुरी, जगदलपुर सहित अन्य जेल शामिल है। यहां कैदियों को पहले प्रशिक्षित किया जाता है। इसके बाद यह कैदी स्वयं अहिंसक वस्त्र तैयार करते हैं।
धागा की कीमत और कारीगर की मजदूरी लेते हैं
अमरकंटक के सर्वोदय तीर्थ क्षेत्र में आयोजित पंचकल्याणक महोत्सव में स्टॉल लगाने वाले जबलपुर निवासी संजीव जैन बताते हैं कि जहां-जहां आचार्यश्री के कार्यक्रम होते हैं वह वहां पर स्टॉल लगाते हैं। उनके पास हथकरघा से बने अभिषेक पूजन वस्त्र, धोती-दुपट्टा, विधान की साडिय़ां, बनारसी साड़ी, महेश्वरी साड़ी सहित अन्य वस्त्र जो पूजा में लगते हैं वह उपलब्ध है। इनके बहुत ज्यादा दाम भी नहीं होते हैं। वह सिर्फ कारीगरों की मजदूरी और धागा की कीमत ही लेते हैं।
स्वदेशी अपनाने अनूपपुर में हथकरघा यूनिट स्थापित करने की तैयारी
आचार्यश्री विद्यासागर महाराज स्वदेशी अपनाने पर जोर दे रहे हैं। इसके लिए वह जहां भी जा रहे हैं वहां हथकरघा यूनिट स्थापित करने पर जोर दे रहे हैं। आचार्यश्री की इसी पहल को मूर्तरूप देने मां नर्मदा के उद्गम स्थल अमरकंटक में हथकरघा यूनिट स्थापित करने की तैयारी की जा रही है। हथकरघा उद्योग स्थापित करने के लिए आवश्यक प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई है। यूनिट के लिए आवश्यक रूपरेखा बनाई जा रही है। पंचकल्याणक महोत्सव के बाद आगे की कार्ययोजना बनाई जाएगी।
भूमि चिन्हित, तैयार कर रहे कार्ययोजना
जानकारी के अनुसार अमरकंटक के समीप ही हथकरघा उद्योग स्थापित करने सर्वोदय तीर्थ क्षेत्र समिति ने आचार्यश्री के सानिध्य में भूूमि चिन्हित कर ली गई है। इस भूूमि पर हथकरघा उद्योग स्थापित कर हाथ से बने वस्त्रों के उपयोग पर जोर दिया जाएगा। जिससे कि आचार्यश्री के स्वदेशी अपनाने के अभियान को जोर मिलेगा।
आचार्यश्री के सानिध्य में होगा पूरा कार्य
स्वदेशी अपनाने के लिए आचार्यश्री जगह-जगह स्टॉल शुरु करा रहे हैं। उनके इसी अभियान के तहत अमरकंटक में हथकरघा उद्योग स्थापित करने का निर्णय लिया है। हथकरघा उद्योग की स्थापना आचार्यश्री के सानिध्य में ही होगी। जानकारों की माने तो पंचकल्याणक महोत्सव के बाद आचार्यश्री इसके लिए आगामी निर्णय ले सकते हैं।
Published on:
02 Apr 2023 12:24 pm
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