19 जनवरी 2026,

सोमवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

माँ की भक्ति का ऐसा जूनून की रिक्शे से कश्मीर से कन्याकुमारी की यात्रा 

पत्नी के साथ पिछले 14 सालों से जा रहा तीर्थयात्रा

2 min read
Google source verification

image

Shahdol Online

Oct 15, 2015

Kashmir to Kanyakumari

shahdol photo

शुभम सिंह बघेल. शहडोल।
देवी मां के प्रति भक्ति की इतनी आस्था की कोसो दूर मां के दरबार पहुंचने के लिए न तो ट्रेन की राह देखी और न ही बस से सफर की सोचा। बस खुद के रिक्शे में ही देवी मां की मंदिर तैयार की और धर्मपत्नी के साथ निकल पड़ा दर्शन के लिए। यह सिलसिला एक दो सालों का नहीं, बल्कि पिछले 14 सालों से चला आ रहा है। कहानी है अनूपपुर जिले के रहने वाले संतोष कुमार यादव की। देवी भक्त संतोष पिछले 14 सालों से लगातार कश्मीर से कन्याकुमारी तक तीर्थयात्रा के लिए निकलता है। जम्मू के वैष्णोदेवी में दर्शन के बाद अलग- अलग तीर्थस्थलों में दर्शन करते हुए रामेश्वरम भी जाता है। संतोष की मानें तो पिछले 14 साल से चल रहे इस तीर्थयात्रा में धर्मपत्नी हर पल साथ निभाती है।

दरगाह में जियारत, गुरुदारा में टेकता है माथा
एकता और अखण्डता के साथ पारिवारिक मन्नत को लेकर कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक के तीर्थयात्रा के सफर के दौरान देवीभक्त संतोष आने वाली अजमेर शरीफ की दरगाह में जियारत करता है और गुरूदारा में माथा भी टेकता है। सभी धर्मो के लिए बिना किसी भेदभाव और भाईचारे की भावना के साथ सभी के लिए दरगाह और गुरूदारा में भी अपनी धर्मपत्नी के साथ शामिल होता है।

छह माह में 12 जगहों की धार्मिक यात्रा
नवरात्रि के पूर्व अनूपपुर से धार्मिक यात्रा के लिए निकलने वाला संतोष पूरे चार माह में यात्रा पूरी करता है। संतोष ने बताया कि अनूपपुर से हरिद्वार, वैष्णोदेवी, मथुरा, करौली माता, सलकनपुर, रामेश्वरम, जगन्नाथ पुरी, नर्मदा उद्गम अमरकंटक, पचमढ़ी, मैहर, चित्रकूट तक की धार्मिक यात्रा करता है। इस धार्मिक यात्रा के दौरान संतोष अजमेर शरीफ दरगाह में भी पहुंचकर जियारत करता है। संतोष ने बताया कि अनूपपुर से तीर्थयात्रा जाने और दर्शन करने में लगभग चार माह लग जाता है। वहीं यात्रा से लौटने में लगभग दो से ढाई माह लगता का समय लगता है।

पूजा के बाद रात में तोड़ता है उपवास
संतोष ने बताया कि धर्मपत्नी के साथ धार्मिक यात्रा के दौरान पूरा दिन उपवास रखता है। सूर्य अस्त होते ही उपवास तोड़ता है। इसके बाद साइकिल रिक्शे में ही बनी देवी मां की मंदिर की पूजा करता है और भी अन्न ग्रहण करता है। संतोष के अनुसार उपवास भी पिछले 14 सालों से यात्रा के दौरान रख रहा है। संतोष ने बताया कि तीर्थयात्रा के पूर्व पारिवारिक मान्यता की थी। जिसके पूरा होने पर तीर्थयात्रा शुरू की है और अब यह साल अंतिम है।

14 सालों से कर रहा हूं यात्रा
पिछले 14 सालों से अनूपपुर से वैष्णोदेवी से लेकर रामेश्वरम तक की तीर्थयात्रा करता हूं। इस दौरान अजमेर शरीफ भी जाता है। तीर्थयात्रा के चार माह जाने और दो माह लौटने के दौरान कई छोटी-छोटी दिक्कतें आती हैं, लेकिन धर्मपत्नी कर हर पग पग पर सहयोग रहता है। कहीं आर्थिक समस्याएं आती हैं तो सहयोग भी मांग लेता हूं।
संतोष कुमार यादव, तीर्थयात्री

ये भी पढ़ें

image