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बेरहम सिस्टम: जिला चिकित्सालय में नहीं मिला शव वाहन, बाइक से ले जाना पड़ा आदिवासी वृद्ध का शव

फिर शर्मसार हुआ जिला अस्पताल, आए दिन बनती है ऐसी स्थिति, प्रशासन के दावे और व्यवस्थाएं सब फेल

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बेरहम सिस्टम: जिला चिकित्सालय में नहीं मिला शव वाहन, बाइक से ले जाना पड़ा आदिवासी वृद्ध का शव

बेरहम सिस्टम: जिला चिकित्सालय में नहीं मिला शव वाहन, बाइक से ले जाना पड़ा आदिवासी वृद्ध का शव

शहडोल. जिला चिकित्सालय में रविवार को वाहन न मिलने पर एक आदिवासी वृद्ध का शव बाइक से ले जाना पड़ा। परिजन पहले शव वाहन के लिए इधर उधर भटकते रहे। कई नंबरों पर फोन भी किया लेकिन कोई मदद नहीं मिली। बाद में मृतक के पोते ने अपने दादा के शव को बाइक पर रखकर शहडोल से 15 किलोमीटर दूर ग्राम धुरवार लेकर पहुंंचा। इतना ही नहीं जिस समय आदिवासी परिवार वृद्ध के शव ले जाने परेशान हो रहा था उस वक्त अस्पताल का स्टॉफ मदद करने के बजाए आनाकानी करने में लगा रहा। ललुइया बैगा पिता पांडू बैगा 56 वर्ष निवासी धुरवार की रविवार की सुबह अचानक तबियत बिगड़ जाने से परिजन करीब 11 बजे जिला चिकित्सालय लेकर पहुंचे। चिकित्सकों ने भर्ती कर उपचार करने की सलाह दी। परिजन वृद्ध को मेडिकल मेल वार्ड में जैसे लेकर पहुंचे तो कुछ ही देर बाद उसकी मौत हो गई। इसके बाद परिजन शव वाहन की तलाश किए लेकिन वाहन उपलब्ध नहीं हो सका। काफी समय तक परेशान होने के बाद मृतक के पोते ने बाइक में शव रखकर परिजनों की मदद से ग्राम धुरवार ले गए।
दिखावे के लिए बना हेल्प डेस्क, फोन तक नहीं उठता
जिला अस्पताल में मरीजों की सुविधा के लिए हेल्प डेस्क बनाया गया है। अस्पताल के मुख्य द्वार पर ही इसे स्थापित भी किया गया है। लेकिन कर्मचारियों की गैर मौजूदगी के कारण यहां से मरीज व उनके परिजनों को सहायता नहीं मिलती। इसके साथ ही अस्पताल में पदस्थ वार्ड बॉय भी मरीजों का हेल्प नहीं करते। जिसके कारण मरीजों को परेशान होना पड़ता है। शनिवार को भी वृद्ध की मौत के बाद हेल्प डेस्क से परिजनों को किसी प्रकार की मदद नहीं मिली और अंतत: परिजनों को बाइक से ही शव ले जाने मजबूर होना पड़ा।
मामला तूल पकडऩे पर ही कार्रवाई
मेडिकल कॉलेज व जिला चिकित्सालय में शव वाहन मिलना कोई नई बात नहीं है। मामला सामने आने पर प्रबंधन व प्रशासन समाजसेवियों के साथ बैठक कर शव वाहन उपलब्ध कराने पर कार्य योजना तैयार करती है। मामला शांत होने के बाद इस पर किसी प्रकार की मॉनीटरिंग नहीं की जाती है। गरीब परिवार परेशान होते हैं।
इनका कहना है
अस्पताल में शव वाहन नहीं है, समाजसेवियों की मदद से उपलब्ध कराया जाता है। वृद्ध के शव ले जाने की जानकारी स्टॉफ ने दी थी। वाहन आने में समय लग रहा था, इसी दौरान परिजन बाइक से शव लेकर चले गए। लापरवाही पर दो गार्डों को हटा दिया है।
डॉ. जीएस परिहार, सिविल सर्जन