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यहां भी हैं टैटू के शौकीन, लेकिन इस बात से हैं अंजान

फैशन के आगे इस गंभीर बात को नजरअंदाज कर रहे लोग

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Tattoo craze but unaware of this

शहडोल- टैटू को लेकर युवाओं में हमेशा ही एक अलग क्रेज देखने को मिलता है। अलग-अलग स्टाइल, अलग-अलग नाम, कोई अपने खास का नाम लिखवा रहा, कोई अपना खुद का नाम लिखवा रहा, कोई अपनी गर्लफ्रेंड का नाम लिखवा रहा, तो कोई कुछ अलग कलाकारी करा रहा। शहडोल के बाणगंगा मेले में भी टैटू का एक अलग ही आकर्षण है। युवा इन स्टालों में खिंचे चले आ रहे हैं। और टैटू बनवा रहे हैं। लेकिन उन्हें नहीं पता कि इस टैटू को बनवाने के साथ ही वो कई संक्रमण को न्योता भी दे रहे हैं।

इस मेले में टैटू का क्रेज, लेकिन कोई नहीं बरत रहा सावधानी
शहडोल संभाग के सबसे बड़े मेले बाणगंगा मेले में टैटू का खासा क्रेज देखने को मिल रहा है। अलग-अलग डिजाइन बनवाना हो फिर किसी का नाम लिखवाना हो, टैटू को लेकर गल्र्स से लेकर ब्वॉयज तक सभी क्रेजी दिख रहे हैं। लेकिन इस मेले में टैटू के स्टॉल में एक बात जो देखने को मिली वो थी असावधानी, एक ओर युवा बिना किसी सावधानी के जांच पड़ताल किए बगैर टैटू बनवा रहे हैं। तो वहीं दूसरी ओर यहां जो व्यापारी टैटू का स्टॉल लगाकर बैठे हैं वो भी सावधानी नहीं बरत रहे हैं। जब स्टॉल वालों से पूछा कि टैटू बनाते समय क्या सावधानी बरत रहे हैं तो उनका कहना था कि वो सुई चेंज कर रहे हैं। लेकिन वहां साफ-साफ दिख रहा था कि एक टैटू बनाने के बाद वो उसी सुई से दूसरा टैटू बनाने में लग जा रहे थे। और इस ओर टैटू बनवाने वाले युवा भी ध्यान नहीं दे रहे थे।

टैटू बनवाने वाले ज्यादातर आदिवासी और ग्रामीण
मेले में लगे ज्यादातर टैटू स्टॉलों में आदिवासी और ग्रामीण युवा ही नजर आ रहे थे। जिन्हें अपने टैटू से तो मतलब था लेकिन अपनी सुरक्षा से नहीं, तो वहीं दूसरी ओर वहां जो स्टॉल लगे हैं वो भी सावधानी नहीं बरत रहे हैं। एक ही सुई पर केमिकल भरकर कई लोगों के शरीर में टैटू बनाया जा रहा है। इससे संक्रमण सहित एचआईवी का डर बना हुआ है।

कई रुपए खर्च कर बनवा रहे टैटू
टैटू का जो क्रेज है उसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि बेझिझक युवा पैसे खर्च करके अपने स्वास्थ्य को ताक पर रखकर धड़ल्ले से टैटू बनवा रहे हैं। मेले में पहुंच रहे ग्रामीण युवा बांह, कलाई, सीना और पीठ में आकर्षक टैटू 50 से 500 रुपए खर्च कर बनवा रहे हैं लेकिन उन्हें इससे होने वाले नुकसान की जानकारी नहीं है और ना ही टैटू बनाने वाला कोई ऐहतियात बरत रहा है। टैटू बनाने के लिए एक ही निडिल (सुई) का कुछ विशेष प्रकार के केमिकल के साथ उपयोग किया जा रहा है।

ये है नुकसान
टैटू बनाने से पहले और बाद में उसे उपचारित नहीं किया जाता और ना ही बदला जाता है। इससे त्वचा संबंधी कई तरह के रोगों के साथ एचआईवी का संक्रमण फैलने की आशंका बनी हुई है। असुरक्षित ढंग से टैटू बनवाने से अन्य व्यक्तियों के गंभीर रोग स्वस्थ मानव के रक्त में पहुंचकर बीमार कर देते हैं। जानकारों के अनुसार शरीर में एक बार टैटू बनवाने के बाद उसे मिटाना मुश्किल होता है। केवल प्लास्टिक सर्जरी से टैटू के निशान हटाए जा सकते हैं।

आगे हो सकती हैं ये दिक्कतें
- टैटू गुदवाने वाला व्यक्ति जीवन में कभी रक्तदान नहीं कर सकता
- त्वचा संक्रमण के साथ रक्त संबंधी बीमारियों की आशंका
- एड्स व हैपेटाइटिस का खतरा
- टैटू वाली जगह पर त्वचा की कोशिकाएं हमेशा के लिए खत्म
- टैटू होने पर सेना व कई नौकरियों में अयोग्य मानना
- असुरक्षित टैटू बनाने से त्वचा और रक्त संबंधी अनेक बीमारियों की आशंका रहती है। एचआईवी जैसे गंभीर रोग भी संक्रमित निडिल से फैल सकते हैं।