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बाइक पर पटिया से बांधकर 80 किमी घर ले गए थे मां का शव, अब आयोग ने हेल्थ कमिश्नर सहित चार बड़े अफसरों से मांगा जवाब

गलती छिपाने लापरवाही पर पर्दा, डीन की दलील- परिजन बोले थे शव ले जाने के लिए हमारे पास है वाहनआयोग ने कमिश्नर हेल्थ, संभागायुक्त व कलेक्टर को तलब कर मांगा जवाबसीएमएचओ व मेडिकल कॉलेज अधीक्षक से भी मांगा लापरवाही पर जवाब, 3 सप्ताह का दिया समय

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बाइक पर पटिया से बांधकर 80 किमी घर ले गए थे मां का शव, अब आयोग ने हेल्थ कमिश्नर सहित चार बड़े अफसरों से मांगा जवाब

बाइक पर पटिया से बांधकर 80 किमी घर ले गए थे मां का शव, अब आयोग ने हेल्थ कमिश्नर सहित चार बड़े अफसरों से मांगा जवाब

शहडोल. मेडिकल कॉलेज शहडोल में एक वृद्ध महिला की मौत के बाद शव वाहन न मिलने पर पटिया से बांधकर बाइक से शव ले जाने के मामले में मप्र मानव अधिकार आयोग ने संज्ञान लिया है। आयोग ने कमिश्नर हेल्थ, कमिश्नर शहडोल, कलेक्टर, मेडिकल कॉलेज अधीक्षक और सीएमएचओ को तलब किया है। आयोग ने अधिकारियों को जवाब देने तीन सप्ताह का समय दिया है। अधिकारियों से पूछा है कि वृद्ध महिला की मौत के बाद शव वाहन क्यों नहीं दिया गया। किन-किन अधिकारी व कर्मचारियों की जिम्मेदारी थी। दरअसल शहडोल मेडिकल कॉलेज अस्पताल में बीते रविवार की सुबह शव वाहन न मिलने से 70 वर्षीया जयमंत्री यादव का शव बाइक से ले जाना पड़ा था। अनूपपुर जिले के कोतमा गोडारू गांव तक 80 किमी का सफर तय करने लिए बेटे सुंदर यादव और परिजन 100 रुपए का पटिया खरीदकर बाइक से बांधकर शव ले गए थे। लकड़ी की पटिया पर अर्थी की तरह शव रखा और फिर बाइक से बांधकर ले गए थे। परिवार प्रायवेट वाहन से शव ले जाने में असमर्थ था। वाहन 4-5 हजार रुपए में मिल रहा था। मामले में मप्र मानव अधिकार आयोग ने कमिश्नर स्वास्थ्य सेवाएंं भोपाल, कमिश्नर, शहडोल संभाग सहित कलेक्टर शहडोल, मेडिकल कॉलेज अस्पताल शहडोल के अधीक्षक तथा सीएमएचओ शहडोल से तीन सप्ताह में तथ्यात्मक जवाब मांगा है।
अस्पताल व पुलिस चौकी में लगवाए नंबर
बाइक से शव ले जाने के बाद प्रशासन ने हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं। जिला अस्पताल, मेडिकल कॉलेज सहित अस्पताल चौकी में नंबर चस्पा कराए हैं। इन नंबरों में कॉल करने से समाजसेवियों के साथ नगर पालिकाओं से शव वाहन दिए जाएंगे। नगर के भीतर शव ले जाने के लिए नपा का हेल्पलाइन नंबर 8305620612 है। रोटरी क्लब के शव वाहन के लिए संजय जैन 9425205130 और डॉ. अभिषेक गर्ग 9826418141 नंबर जारी किया है। कलेक्टर वंदना वैद्य के अनुसार, अस्पताल चौकी, जिला अस्पताल प्रबंधन और मेडिकल कॉलेज प्रबंधन के साथ मीटिंग कर निर्देश दिए है कि शव देने से पूर्व परिजनों से वाहन की व्यवस्था अनिवार्य रूप से करें। वाहन न होने पर नपा व समाज सेवियों से चर्चा कर व्यवस्था बनवाएं।
दलील: परिजनों ने प्रबंधन से नहीं मांगा वाहन
बाइक से शव ले जाने का मामला तूल पकड़ते ही गलती छिपाने मेडिकल कॉलेज प्रबंधन ने लापरवाही पर पर्दा डाल दिया। डीन का कहना था कि परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन से किसी तरह के शव वाहन की डिमांड नहीं की गई थी। अस्पताल प्रबंधन के अनुसार, वृद्ध महिला की मौत के बाद कर्मचारी ने आइसीयू ने शव को नीचे तक पहुंचाया था। कर्मचारी ने परिजनों से पूछा था कि शव ले जाने के लिए क्या व्यवस्था है। इस दौरान परिजनों का कहना था कि वाहन है, जो गेट के बाहर खड़ा है। वार्ड ब्वॉय ने वाहन को अंदर लाने भी कहा था लेकिन परिजन शव को बाहर ले गए और बाइक पर बांधकर चले गए। डीन का कहना था कि वाहन के संबंध में अस्पताल प्रबंधन से चर्चा नहीं की गई थी।