
मध्यप्रदेश के इस मंदिर में शिवलिंग पर पड़ती है सूर्य की पहली किरण
शहडोल. सोहागपुर बाण गंगा स्थित विराटेश्वर मंदिर के दर्शन करने दूर-दूर से लोग आते है। हर दिन सैकड़ों की संख्या में इस मंदिर में श्रद्धालु पहुंचकर पूजा अर्चना करते है। इस विराटेश्वर मंदिर का निर्माण एक चबूतरे पर किया गया है। इस मंदिर के भू-विन्यास में अर्धमंडप, महामंडप, अन्तराल और वर्गाकार गर्भगृह है। करीब 3 मीटर वर्गाकार गर्भगृह में एक शिवलिंग एवं जलथारी है। मंदिर के बाहर के दीवारों में दिक्पाल वसु, शिव की विविध रूप, शिव परिवार, विष्णु अवतार के अद्भुत दृश्य है जो खजुराहो मंदिर के तरह है तथा मंदिर को सुंदर तरीके से शिल्पांकन किया गया है। इन सभी के अलावा मंदिर में सबसे आकर्षण बहुभुजायुक्त नृत्यरत शिव की प्रतिमा है। मंदिर के मंडप में भी कई सारे प्रतिमाएं रखी हुई हैं। लोगों की मान्यता है कि विराटेश्वर मंदिर में विराजमान शिवलिंग के दर्शन करने से 12 ज्योॢतलिंग के दर्शन के बराबर है। इसी मान्यता से लोग यहां दूर-दूर से आते है।
मंदिर का इतिहास
विराटेश्वर मंदिर का निर्माण 9वीं 10वी शताब्दी में कलचुरी शासक युवराज देव प्रथम ने गोलकी मठ के आचार्य के सामने पेश करने के लिए बनवाया था। इस धरोहर की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए वर्ष 1975 में इस मंदिर को केंद्रीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग को सौंपा गया था। शिव मंदिर को लेकर पुरातत्वविद् रामनाथ सिंह परमार ने बताया है कि संभाग का यह विशिष्ट शिव मंदिर है। यह विराटेश्वर मंदिर के नाम से जाना जाता है, इस मंदिर का निर्माण कलचुरी नरेश युवराज देव प्रथम ने करवाया था। इस मंदिर का निर्माण 10 वीं 11 वीं सदी ईस्वी में कराया गया था। खास बात यह कि इतने बड़े मंदिर के गर्भगृह में छोटे शिवलिंग हैं जो अपने आप में अनूठा है। मंदिर की लंबाई 46 फीट, चौड़ाई 34 फीट और ऊंचाई 72 फिट है।
श्रावण मास में विरटेश्वर मंदिर में सुबह से लेकर शाम तक श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है। सावन सोमवार को भक्तो की संख्या दोगुनी तक बढ़ जाती है। इस मंदिर की एक खास बात यह भी है कि यहां पर कोई पुजारी नहीं है। मंदिर में श्रद्धालु खुद दूध,दही, बेल व मधुरस का अभिषेक करते है। 1000 साल से अधिक समय से चली आ रही पंरपरा के अनुसार ही मंंदिर में भक्त पूजा अर्चना करते है।
शिवलिंग पर पड़ती है पहली किरण
बाणगंगा मंदिर के पुजारी अभिषेक द्विवेदी ने बताया कि विराटेश्वर मंदिर के अंदर विराजमान शिवलिंग पर सूर्य की पहली किरण पड़ती है। उन्होनें बताया कि द्वापर काल से शिवलिंग की पूजा करने की परंपरा चली आ रही है। मंदिर में विराजमान भोले नाथ अजर-अमर है जिनके दर्शन मात्र से ही मनकामनाओं की पूर्ती होती है।
Published on:
16 Jul 2022 11:41 am

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