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800 ग्राम था वजन, डॉक्टर भी हो गए हैरान लेकिन कमाल कर दिया

800 ग्राम के नवजातों की बार-बार रुकती थी सांस, 15 दिन-24 घंटे इलाज कर बचाई जिंदगी, अब नवजातों की हालत में सुधार, एसएनसीयू से किया डिस्चार्ज

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800 ग्राम था वजन डॉक्टर भी हो गए हैरान, लेकिन कमाल कर दिया

शहडोल. जिला अस्पताल के एसएनसीयू के डॉक्टर और टीम ने जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे दो नवजातों को नया जीवनदान दिया है। डॉक्टरों ने 15 दिन तक दोनों मासूमों को रखकर एसएनसीयू में 24 घंटे एक करके इलाज किया। बार- बार नवजातों की हालत बिगड़ रही थी लेकिन मौत भी डॉक्टर और टीम के हौसलों के आगे हार मान गई। दोनों नवजातों की हालत अब स्थिर हैं और एसएनसीयू से डिस्चार्ज कर दिया गया है। डॉक्टरों के अनुसार एक नवजात समय से तीन माह पहले ही जन्म ले लिया था जबकि दूसरा नवजात दो माह पहले जन्म ले लिया था। दोनों का शरीर पूरी तरह नहीं बन पाया था। एक नवजात का वजन 800 ग्राम था तो दूसरे नवजात का वजन 1 किलो था। दोनों नवजातों के बचने की बेहद कम संभावना थी लेकिन डॉक्टरों ने मेहनत के बाद दोनों नवजातों की जिंदगी बचाई है।


जिला अस्पताल के लिए पहला केस
एसएनसीयू के डॉक्टरों के अनुसार 800 ग्राम का नवजात तीन माह पहले पैदा होने का मामला पहली बार जिला अस्पताल आया है। रामरति अगरिया को हाल ही में जिला अस्पताल में प्रसव हुआ था। नवजात 800 ग्राम का था। इसी तरह उमरिया के चौरी निवासी बुड्डी बाई ने जुडवा बच्चों को जन्म दिया था। जिसमें एक नवजात का वजन एक किलो था। दोनों की हालत बेहद खराब थी। बीच बीच में मासूमों की हालत काफी बिगड़ी और रेफर की स्थिति बनी लेकिन फिर भी डॉक्टरों ने जिला अस्पताल में ही रखकर इलाज किया।


ब्रेन हेमरेज और हार्ट डेवलप न होने का था खतरा
डॉ सुनील हथगेल के अनुसार एक नवजात का वजन 800 ग्राम था, जबकि दूसरे नवजात का वजन एक किलो था। दोनों का हार्ट न बनने का और बे्रेन हेमरेज का खतरा था। दोनों बच्चों की सांसे भी रुक सकती थी और बचा पाना मुश्किल था। डॉक्टर और टीम ने 15 दिन तक एसएनसीयू में रखकर इलाज किया।


रुक जाती थी सांस, हर सप्ताह करेंगे फॉलोअप
दोनों नवजात समय से काफी दिन पहले ही पैदा हो गए थे। इस वजह से दोनों बच्चों का वजन बेहद कम था। बीच- बीच में सांस भी रुक जाती थी। बचा पाना मुश्किल था। ब्रेन हेमरेज और हार्ट डेवलप न होने का खतरा था फिर भी टीम ने रखकर १५ दिन तक इलाज किया। अंतत: बच्चों को बचाया जा सका। अब हर सप्ताह बच्चों का फॉलोअप कराया जाएगा।
डॉ सुनील हथगेल, डॉक्टर