शहडोल/उमरिया. पहाड़ों, नदियों और नहरों व अन्य कठिन स्थानों में फंसे वन्यजीवों के बचाने के साथ ही बाघों के रेस्क्यू में अहम भूमिका निभाने वाले बांधवगढ़ नेशनल पार्क के हाथियों के लिए गुरुवार से हाथी महोत्सव मनाया जा रहा है। सात दिवसीय हाथी महोत्सव के दौरान इनसे किसी भी प्रकार का काम नहीं लिया जाएगा। इस दौरान सभी हाथियों की विशेष आवभगत के साथ ही इन्हे अपने परिवार से मिलने का अवसर प्रदान किया जाएगा। हाथी महोत्सव का शुभारंभ गुरुवार को प्रभारी फील्ड डॉयरेक्टर एलएल उइके ने किया। इस अवसर पर बांधवढ़ नेशनल पार्क के सभी अधिकारी कर्मचारी, महावत, गाइड व स्थानीय लोग उपस्थित रहे। हाथी महोत्सव के दौरान सात दिनों तक बांधवगढ़ के 12 हाथियों की विशेष भगत होगी। इन 12 हाथियों में लगभग 74 वर्षीय गौतम व 6 वर्षीय गायत्री शामिल है। बांधवगढ़ नेशनल पार्क में कुल 14 हाथी थी इनमें गौतम, रामा, अष्टम, अनारकली, लक्ष्मण, पूनम, सूर्या, बांधवी, गायत्री, श्याम, गणेश व सुन्दरगज शामिल है, जबकि लक्ष्मी की हाल ही में हाथी के हमले में मौत हो गई। वहीं काजल को रेस्क्यू के लिए भेजा गया है। इन हाथियों को 1 अक्टूबर से प्रारंभ हो रहे पर्यटन को लेकर तैयार किया जा रहा है। हाथी महोत्सव के दौरान हाथियों की तेल मालिश के साथ इनका चिकित्सकीय परीक्षण भी कराया जाता है। वन परिक्षेत्र अधिकारी ताला रंजन सिंह परिहार ने बताया कि सुबह चरण गंगा नदी में स्नान कराने के बाद आरंडी के तेल से हाथियों की मालिश की जाती है। इसके बाद उनके पैरों में नीम के तेल का लेप लगाया जाता है और फिर इनकी विधिवत साज-सज्जा की जाती है। हाथियों के तैयार होने के बाद इनकी पूजा अर्चना कर इनके पसंदीदा फल खिलाएं जाते हैं। भोजन में इन्हे नाशपाती, केला, सेवा, कच्चे नारियल, गुड़, गन्ने, मक्का व उसके पौधे लगभग 5-5 किलो फल के साथ ही प्रत्येक हाथी को 10-10 रोटियां खिलाई जाती है। इसके बाद इन्हे हाथी कैम्प में छोंड़ दिया जाता हैं। हाथी महोत्सव में सीसीएफ शहडोल एवं प्रभारी बांधवगढ़ टाईगर रिजर्व एलएल उईके, एसडीओ सुधीर मिश्रा, विवेक सिंह परिक्षेत्राधिकारी, विजय शंकर श्रीवास्तव, अर्पित मेराल, रंजन सिंह परिहार, शीलबधुं श्रीवास्तव, मुकेश अहिरवार, स्वास्तिक जैन, महावत, गाइड, ड्राइवर रहे।