7 फ़रवरी 2026,

शनिवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

आस्था का केंद्र और पुरखों की धरोहर है विराटेश्वर मंदिर, तिरछा हो रहा मंदिर

मंदिर का निर्माण कल्चुरीकालीन राजा युवराज प्रथम ने कराया था

less than 1 minute read
Google source verification
Virateeshwara Temple is center of faith and heritage of ancestors

आस्था का केंद्र और पुरखों की धरोहर है विराटेश्वर मंदिर, तिरछा हो रहा मंदिर, देखें वीडियो

शहडोल। सावन आज से शुरू हो गया है। श्रद्धालु आज से मंदिरों में पूजन-अर्चन के लिए पहुंचने लगते हैं। ऐसे में विराटेश्वर मंदिर में भी काफी संख्या में श्रद्धालु पूजन-अर्चन के लिए पहुंचते हैं। विराटेश्वर मंदिर पूरे संभाग में आस्था का केंद्र तो है ही, हमारे पुरखों की धरोहर भी है। ये मंदिर धार्मिक रूप से तो महत्वपूर्ण है ही साथ में शिल्प और दर्शन के लिहाज से भी बहुत महत्वपूर्ण है।

यह भी पढ़ें-मौसम की बेरूखी से रोपा के साथ मुरझाने लगे किसानों के चेहरे, खेतों में सूख गया बारिश का पानी

युवराजदेव प्रथम भगवान शिव के अनन्य भक्त थे

इस मंदिर का निर्माण कल्चुरीकालीन राजा युवराजदेव प्रथम ने कराया था। युवराजदेव प्रथम भगवान शिव के अनन्य भक्त थे, इसलिए उन्होंने सामाजिक एवं धार्मिक महत्व को ध्यान में रखकर मंदिर का निर्माण कराया था। दसवीं शताब्दी के उत्तराद्र्ध में निर्मित इस मंदिर में पूर्व की ओर मुख्य द्वार है। यह मंदिर वेसर शैली में बना है जिसमें मंडप, अंतराल और गर्भगृह है।

यह भी पढ़ें-इंटरनेशनल जस्टिस डे: फाइल पहुंचते ही सुना दी सजा, दरिंदगी पर 6 माह में 27 को भेजा जेल

तिरछा हो रहा मंदिर
पिछले कुछ वर्षों से मंदिर का आकार तिरछा हो रहा है। देखने से ऐसा प्रतीत होता है कि कुछ दिनों बाद मंदिर कहीं गिर न जाए। जानकारों की माने तो मंदिर सेन्ड स्टोन से बना जो पानी पडऩे पर लेयर छोड़ता है और शायद मंदिर को गिरने से बचाने के लिए विभागीय तौर पर ड्रेनेज को बंद करने का निर्णय लिया गया हो। यह भी पढ़ें-प्रशासन ने की माफियाओं पर कार्रवाई, फाइल दबाकर बैठे वन विभाग के अफसर