
शहडोल. बांधवगढ़ नेशनल पार्क और इससे सटे जंगलों में पिछले तीन साल से जंगली हाथियों का मूवमेंट है। झारखंड, छत्तीसगढ़ के रास्ते शहडोल सर्किल में पहुंचे जंगली हाथियों ने अब तक वापसी नहीं की है। बांधवगढ़ पनपथा बफर क्षेत्र में 40 से ज्यादा हाथियों का झुण्ड चहलकदमी कर रहा है। इसी बीच झुण्ड में एक हाथी की हालत बिगड़ गई। जंगल के बीच में हाथी तड़प रहा था। ग्रामीणों की सूचना के बाद बांधवगढ़ पार्क प्रबंधन की टीम ने रेस्क्यू की प्लानिंग की और शाम को ही ब्यौहारी और बांधवगढ़ के बीच घोरीघाट छतवा गांव पहुंच गए। जहां बाद में रेस्क्यू टीम व डॉक्टरों की टीम ने जान पर खेलकर हाथी का इलाज किया और उसकी जान बचाई।
10-15 घंटे के इलाज के बाद बची जान
रेस्क्यू टीम के अनुसार हाथी की सूंढ़ और पूछ में कोई हलचल नहीं थी और वो पेट व पैर के बल बार-बार उठने का प्रयास कर रहा था। आशंका थी कि कीटनाशक का सेवन कर लिया है। बीटीआर की टीम ने 20 बोतल के माध्यम से हाथी को दवाइयां देते हुए इलाज किया। लगभग 10 से 15 घंटे निगरानी में रख इलाज कर जान बचाई है। बाद में जेसीबी के माध्यम से हाथी को उठाया, जिसके बाद हाथी झुण्ड में शामिल हुआ। रेस्क्यू में फील्ड डायरेक्टर बांधवगढ़ राजीव मिश्रा, रेंजर पनपथा बफर सील सिंधु, डॉ नितिन गुप्ता, वाइल्ड लाइफ ट्रस्ट ऑफ इंडिया कंसल्टेंट पुष्पेन्द्र नाथ द्विवेदी, कमला कोल, पुष्पेन्द्र मिश्रा सहित सुरक्षा श्रमिक की भूमिका रही।
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जान पर खेलकर बचाई जान
बांधवगढ़ फील्ड डायरेक्टर सुधीर मिश्रा के अनुसार बीमार जंगली हाथी का इलाज करना आसान नहीं था। सबसे बड़ा खतरा जंगली हाथियों के झुंड से ही था जो अपने साथी के लिए बार-बार लौटकर वहां पर पहुंच रहे थे। इसलिए पूरी प्लानिंग की गई और जंगली हाथियों के कारण इलाज बाधित न हो इसलिए जहां पर हाथी का इलाज किया जा रहा था वहां चारों ओर सुरक्षा श्रमिकों को लगाया गया। चारों ओर पटाखों की आवाज के साथ ही मिर्ची का धुंआ किया गया और जंगली हाथियों को लगातार डायवर्ट करते रहे तब कहीं जाकर बीमार हाथी का इलाज किया जा सका।
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Published on:
30 Oct 2022 06:52 pm

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