
Women were told to get beautiful and stunning children from pregnancy
शहडोल. प्राचीनकाल से ही भारतीय संस्कृति में मनुष्य के लिए जन्म से मृत्यु तक सोलह संस्कारों की व्याख्या की गई है। इनमें गर्भ संस्कार भी एक प्रमुख संस्कार माना गया है। चिकित्सा विज्ञान यह स्वीकार कर चुका है कि गर्भस्थ शिशु किसी चैतन्य जीव की तरह व्यवहार करता है तथा वह सुनता और ग्रहण भी करता है। माता के गर्भ में आने के बाद से गर्भस्थ शिशु को संस्कारित किया जा सकता है तथा दिव्य संतान की प्राप्ति की जा सकती है। गर्भ संस्कार से सुन्दर तेजस्वी संतान कैसे प्राप्त कर सकते है इस विषय पर जानकारी देने के लिए नगर में पहली बार कॉस्मॉस योग संस्था द्वारा निजी टुटोरिअल्स गंज रोड में नि:शुल्क कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में योग प्रशिक्षक शोभा रत्नम, स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. मंजू पांडेय, बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. चित्रा श्रीरालकर, नेस्थीसिया डॉक्टर दिलशाद, पंडित सचिन कृष्ण शास्त्री अध्यात्मिक गुरु वक्ताओं के रूप में उपस्थित रहे।कार्यशाला में योग प्रशिक्षक ने गर्भ संस्कार के बारे में जानकारी दी। स्त्री रोग विशेषज्ञ ने बताया कि गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को समय-समय पर डॉक्टर द्वारा जांच कराते रहना चाहिए। गर्भावस्था के दौरान आहार की कमी गलत आहार से गर्भस्थ शिशु को कई बीमारियां मिल जाती है, इसलिए महिला को पौष्टिक आहार लेना चाहिए। डॉक्टर दिलशाद में जानकारी दी कि गर्भ में पल रहे शिशु का विकास गर्भवती महिलाओं की भावनाओं विचार आहार एवं वातावरण पर निर्भर करता है। इसलिए गर्भवती महिला को हमेशा स्वास्तिक आहार एवं सकारात्मक सोच रखनी चाहिए। जिससे गर्भवती महिला तेजस्वी शिशु को जन्म दे सके।
आध्यात्मिक गुरु ने बताया कि गर्भवती महिला को गर्भावस्था के दौरान अपने विचार भावनाएं जीवन की ओर देखने का दृष्टिकोण सकारात्मक रखना चाहिए। कार्यक्रम के दौरान वक्ता के विचारों को सुनने के लिए कई पति-पत्नी उपस्थित रहे।
Published on:
02 Jul 2019 07:20 am

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