
ठोस व तरल अपशिष्ट प्रबंधन की कार्य योजना तैयार, पांच सौ से अधिक आबादी पर हर पंचायत में खर्च होंगे २० लाख
शहडोल। जिले के पांचों जनपदो की ३९१ पंचायतों के ओडीएफ घोषित होने के बाद अब ग्रामीण क्षेत्रों में ठोस अवशिष्ट प्रबंधन के लिए कार्य योजना तैयार की गई है। इस योजना में हर पंचायत में पांच सौ से अधिक आबादी पर बीस लाख रुपए खर्च किए जाएंगे।जिसमे घर-घर डस्टविन रखा जाएंगा। इसके साथ ही कचरा सग्रहण के लिए शेड बनेगा। जिसकी रूपरेखा जिला पंचायत द्वारा तैयार कर ली गई है। अब इस योजना को लोक सभा चुनाव के बाद असली जामा पहनाया जाएंगा। शहर के साथ ग्रामीण क्षेत्रों को भी साफ-सुथरा रखने के लिए यह योजना कारगर सावित हो सकती है। जिसके लिए जिला पंचायत द्वारा सभी तैयारिया पूरी कर ली गई है। लोक सभा चुनाव की आचार संहिता खत्म होते ही ठोस अवशिष्ट प्रबंधन पर काम शुरू हो जाएंगा।
ठोस व तरल अवशिष्ट प्रबंधन के तहत पंचायतो में सर्वे का काम पूरा कर लिया गया है। पंचायतों में जहां आबादी तीन सौ है। वहां दस लाख रुपए खर्च किए जाएंगे। इसी तरह तीन सौ से पांच सौ आबादी के बीच में 15 लाख खर्च किए जाएंगे। पांच सौ से अधिक आबादी पर बीस लाख खर्च करने का प्रावधान बनाया गया है। स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत दो सालों में जिले की ग्राम पंचायतों में ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन के लिए काम किए जाएंगे। इनके तहत गांवों में गोबर गैस संयंत्र, कंपोस्ट पिट, वर्मी कंपोस्ट पिट, कूड़ादान, सोख्ता पिट व निकासी नाली का निर्माण होगा।
स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण के तहत गांवों में ठोस एवं तरल कचरे को अलग-अलग करने के लिए प्रोजेक्ट लगाने के लिए प्रशासन ने प्रोजेक्ट तैयार करके भेजे थे। जिसको हरी झंडी मिल चुकी है। ग्रामीण क्षेत्रों में ठोस एव ं तरल अपशिष्ट प्रबंधन ग्राम विकास का एक महत्वपूर्ण घटक होगा। बढ़ती आबादी के साथ-साथ जल एवं स्वच्छता की समस्याओं को पर्यावरण तथा स्थायी प्रबंधन की दृष्टि से विश्लेषण कर योजनाबद्ध तरीके से कार्य किये जाने पर ही विकास एवं संपूर्ण स्वास्थ्य संबंधी लक्ष्यो को प्राप्त किया जा सकता है। इसी परिपेक्ष्य में भारत सरकार के निर्मल भारत अभियान में ग्रामीण क्षेत्रों में समन्वित रूप से ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन हेतु योजना के क्रियान्वयन का निर्णय लिया हैै।
ये है उदेश्य
१.ग्रामीण क्षेत्रों में निवासरत लोगों के स्वास्थ्य की रक्षा करना और उनके जीवन
स्तर को उन्नत बनाना
२. पर्यावरण प्रदूषण को कम करना और ग्रामीण परिवेश को स्वच्छ रखना
३. ठोस एव ं तरल अपशिष्ट के पुन:चक्रण एवं पुन: उपयोग को प्रोत्साहित करना
४. ग्राम स्तर पर जैविक अपशिष्टो को खाद के रूप में परिवर्तित करना
५. ठोस तथा तरल अपशिष्ट प्रबंधन द्वारा ग्रामीण निर्धन वर्ग के लिये रोजगार
सृजित करना
इनका कहना है-
ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन के लिए जिले की सभी पंचायतों में चरणबद्ध तरीके से कार्य
किया किया जाएंगा। इन कार्यों के क्रियान्वयन के लिए सहभागी विधि से योजना निर्माण द्वारा ठोस एवं तरल दोनेां घटको का समावेश किया जाएंगा ।
जीएस टेकाम
एडिसनल सीईओ जिला पंचायत शहडोल
Published on:
29 Mar 2019 08:03 pm
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