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#Flash Back हिमगिरि एक्सप्रेस हादसे की यादें हुईं ताजा, SC का आया फैसला

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद हिमगिरी ट्रेन हादसे की यादें ताजा हो गई हैं। देखिए, घटना के समय का दिल दहला देने वाला वीडियो और फोटो।

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Amit Sharma

Jul 06, 2016

Himgimgiri Express Incident

Himgimgiri Express Incident

शाहजहांपुर।
साल 2011 में शाहजहांपुर में हुए हिमगिरी एक्सप्रेस हादसे पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आ गया है। इसके साथ ही एक बार फिर हादसे की यादें ताजा हो गई हैं। इस दुर्घटना में सेकंड एसी की बोगी की छत पर सवार तमाम युवक शाहजहांपुर रेलवे स्टेशन के नजदीक बने एक फुट ओवर ब्रिज की छत से टकरा गए। पुल से टकराने पर डेढ़ दर्जन के आसपास युवक मारे गए थे। ख़ास बात ये भी है कि मारे गए ये सभी युवक 20 से 25 साल की उम्र के थे। रेल प्रशासन ने इस हादसे में मारे गए और घायल हुए लोगों को कोई भी मदद देने के बजाए मृतक और घायल युवकों को ही दोषी ठहरा दिया था। लेकिन अब उन युवकों के परिवार वालों को राहत मिलने का रास्ता साफ हो गया है।




दरअसल एक फरवरी 2011 को जम्मू से हावड़ा जाने वाली 12332 डाउन हिमगिरी एक्सप्रेस दोपहर बाद 3:30 बजे बरेली से चली थी। उस वक्त बरेली में आईटीबीपी की भर्ती चल रही थी। भारत-तिब्बत सीमा पुलिस में भर्ती देखने बरेली पहुंचे तमाम युवकों की भारी भीड़ बरेली जंक्शन पर थी। एक्सप्रेस में अंदर जगह न मिलने पर सैकड़ों की तादात में युवक ट्रेन की छत पर बैठ गए। शाम लगभग 4:45 बजे शाहजहांपुर जंक्शन से हिमगिरी एक्सप्रेस गुजरी तो छत पर सवार युवक शाहजहांपुर ट्रेन की छत पर खड़े होकर अपनी मदद को चिल्लाने लगे। इसी दौरान शाहजहांपुर रेलवे स्टेशन से ठीक पास में बने फुट ओवर ब्रिज की चपेट में आकर बड़ी तादात में भर्ती देखने वाले नौजवान लहूलुहान हो गए।




इस हादसे में अपने साथियों को घायल देख भर्ती देखने आए युवकों ने हंगामा शुरू कर दिया। ट्रेन के कई कोच खून से रंग चुके थे। कुछ लोगों ने ट्रेन के गार्ड और ड्राइवर के साथ मारपीट भी की थी। जबकि कुछ नौजवानों ने ट्रेन के एसी थ्री टियर कोच में आग लगा दी। ट्रेन के जिस कोच में आग लगाई गई उसके ऊपर उनके साथियों के सब लटके हुए थे। आग लगने के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई हादसे में 15 युवकों की घटना स्थल पर ही मौत हो गयी थी। 16 अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। जिसमें तीन युवकों की अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गयी थी।




इसके बावजूद उत्तर रेलवे के अधिकारियों ने ट्रेन की छत पर सफर को अपराध मानते हुए मरने वालों और घायलों को ही हादसे के लिए जिम्मेदार ठहरा दिया। मृतकों के घरवालों ने रेल प्रशासन पर सीट नहीं होने पर टिकट जारी करने और हिमगिरी एक्सप्रेस के यात्रियों को स्पेशल ट्रेन से लखनऊ भेजे जाने की बात को मुख्य रूप से रखा था। अब सुप्रीम कोर्ट ने मुआवजे दिए जाने का फैसला दिया है।


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