मौक़ा था भारत के पूर्व प्रधान मंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के जन्मदिन का। उमा भारती की सम्बोधन के दौरान कई बार जुबान फिसली। उमाभारती ने कहा कि अगर किसी को नेतागीरी सीखना है तो वह नेताजी सुभाष चंद्र बोस की नीतियों से सीखे क्योंकि नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने अपने जीवन में कभी भी न कोई लोकसभा चुनाव लड़ा और न वो कभी मुख्यमंत्री, प्रधानमंत्री बने लेकिन इसके बावजूद लोग उन्हें नेता कहते हैं। इसके अलावा उमा भारती ने अच्छे नेता की परिभाषा और उसके गुण भी बताये। उमा भारती ने कहा कि नेता बनने के लिए आदमी के बीच अच्छी पर्सनालिटी होनी चाहिए ताकि जनता उसको पसंद करे। लेकिन अभी तक जो जो चुनाव हुए हैं वह सदैव सांप्रदायिकता जाति और धर्म के नाम पर लड़े गए। आपसी फूट डालकर चुनाव लड़े गए भ्रष्टाचार के नाम पर कभी चुनाव नहीं लड़ा गया। लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सदैव जनता की जरूरतों पर चुनाव लड़ा और जनहित की बातें कर ही आगे बढ़े। असली नेता की पहचान तो नरेंद्र मोदी से है जिसने देश की जरूरतों को समझा।