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video : जब पेड़ से आई गाने की आवाज, तो चौंक गए लोग…

शहर के भीड़ भरे क्षेत्र में जब लोगों ने पेड़ पर बैठे एक व्यक्ति की आवाज सुनी, तो चौंक गए।

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शाजापुर। बुंदेले हरबोलों के मुंह हमने सुनी कहानी थी, खूब लड़ी मर्दानी वह तो झांसी वाली रानी थी...। यह कविता हम सबने पढ़ी है, लेकिन ये हरबोले समय के साथ-साथ कम या कहें मानों खत्म ही हो गए हैं। ऐसे में जब मंगलवार को शहर के भीड़ भरे क्षेत्र में जब लोगों ने पेड़ पर बैठे एक व्यक्ति की आवाज सुनी, तो चौंक गए।

सूर्योदय के पहले चढ़ जाते हैं पेड़ पर
जी हां, हम बात कर रहे हैं बुंदेलखंड के हरबोलों की। ये लोग सूर्य उदय होने से पहले पेड़ पर चढ़कर अपने क्षेत्र की वीर गाथाओं को लोकगीतों के माध्यम से प्रस्तुत करते थे, यह पुरानी परंपरा अब लगभग विलुप्त सी हो गई है। रही बात हरबोलों की तो जब उन्हें उनका मेहनताना और सुनने वालों से प्रशंसा नहीं मिलती, तो उन्होंने भी इस कला को अपने भीतर ही कैद कर दिया।

राजा-महाराजाओं की सुनाते हैं वीरगाथा
हरबोले अक्सर राजा-महाराजाओं की वीरगाथाएं पेड़ पर चढ़कर लोगों को सुनाते हैं और उनका मनोरंजन करते हैं। यह बहुत पुरानी परंपरा रही है। इसके अलावा राजा के दरबार में भी बिरदावली गाने के लिए कभी-कभी इन्हें बुलाया जाता था, ताकि राजा को अपनी गाथा सुनकर शौर्य जागे।

आज के बच्चों को पता ही नहीं क्या होता है हरबोला
मोबाइल और दिनभर टीवी पर चिपके रहने वाले आजकल के आधुनिक शैली में पल-बढ़ रहे बच्चों को यह पता ही नहीं कि आखिर ये हरबोला क्या होता है। हालांकि जिन घरों में दादा-दादी या नाना-नानी हैं, वे उन्हें बतौर कहानी के रूप में इनके बारे में कुछ किस्से सुना दिया करते हैं।

गाना सुनकर लग गई भीड़
शाजापुर के आजाद चौक पर भीड़ से भरे बाजार में जब हरबोले ने सुबह-सुबह गाना शुरू किया तो पहले तो लोग चौंक गए कि यह कौन गा रहा है, फिर वहां सुनने वालों की भीड़ जमा हो गई।

कौन हैं ये हरबोले...
हरबोले किसी भी जगह जाकर पेड़ पर बैठ जाते हैं और पुरानी गाथाएं गाने के रूप में सुनाना शुरू कर देते हैं। प्राचीन गाथाओं को सुनकर लोगों में अपने क्षेत्र के राजाओं के शौर्य की जानकारी मिलती थी, साथ ही उनका मनोरंजन भी होता था, क्योंकि उस दौर में मनोरंजन के साधन भी कम ही हुआ करते थे।

ईनाम लेकर ही वापस उतरा पेड़ से
हरबोला पेड़ पर कब चढ़ा, यह किसी को नहीं पता। लोग उसके लोकगीतों को सुनकर जमा हो गए। लोगों का पेड़ पर बैठे हरबोला ने अपने लोकगीत से मनोरंजन किया। इसके बाद उसे इनाम का लालच देकर नीचे उतारा और सभी ने यथाशक्ति उसे इनाम भी दिया।