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चीलर नदी से पानी गायब, हरे मैदान में तब्दील हुआ नदी का स्वरूप

शाजापुर. नगर के मध्य से होकर बहने वाली चीलर नदी, जिसे कभी शहर की जीवनरेखा कहा जाता था, आज अपनी बदहाली पर आंसू बहा रही है। कभी कल-कल करती बहने वाली यह नदी अब जलकुंभी के कारण पानीविहीन होकर एक हरे मैदान जैसी दिखाई देने लगी है। नदी में वर्षों से गंदे नालों का पानी […]

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शाजापुर

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Ashish Sikarwar

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Ashsih Singh Sikarwar

Jan 31, 2026

चीलर नदी से पानी गायब, हरे मैदान में तब्दील हुआ नदी का स्वरूप

शाजापुर. नगर के मध्य से होकर बहने वाली चीलर नदी, जिसे कभी शहर की जीवनरेखा कहा जाता था, आज अपनी बदहाली पर आंसू बहा रही है। कभी कल-कल करती बहने वाली यह नदी अब जलकुंभी के कारण पानीविहीन होकर एक हरे मैदान जैसी दिखाई देने लगी है। नदी में वर्षों से गंदे नालों का पानी मिलने के कारण बहाव रुक गया और गंदगी बढ़ती चली गई। बीते दो वर्षों से नदी की सफाई न होने के चलते जलकुंभी ने पूरी नगरीय सीमा में नदी को पूरी तरह ढक लिया है, जिससे नदी का अस्तित्व ही संकट में पड़ गया है।

योजनाएं बनीं, हालात नहीं बदले

चीलर नदी की सफाई और संरक्षण के लिए हर वर्ष योजनाएं बनाई जाती रहीं, लेकिन अधिकतर प्रयास केवल कागजों तक ही सीमित रहे। कभी वृहद परियोजनाओं की घोषणा की गई तो कभी औपचारिकता निभाने भर के अभियान चलाए गए, लेकिन धरातल पर कोई ठोस सुधार नजर नहीं आया। मल-जल परियोजना के दौरान यह दावा किया गया था कि नदी में मिलने वाले बड़े नाले बंद कर दिए जाएंगे, जिससे चीलर नदी की दशा सुधरेगी, लेकिन आज भी नालों से लगातार गंदा पानी नदी में मिल रहा है। इसके चलते नदी की स्थिति दिन-ब-दिन और बदतर होती जा रही है।

जलकुंभी बनी भूजल संकट की वजह

कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों के अनुसार जलकुंभी केवल पानी में ही पनपती नहीं, बल्कि पानी को तेजी से अवशोषित भी करती है। जहां-जहां जलकुंभी फैलती है, वहां जलस्तर तेजी से नीचे जाने लगता है। वैज्ञानिकों का मानना है कि चीलर नदी में फैली जलकुंभी के कारण पूरे नगर क्षेत्र में भूजल स्तर पर भी प्रतिकूल असर पड़ रहा है। वर्तमान स्थिति यह है कि नदी में जलकुंभी के अलावा कुछ भी नजर नहीं आता और पानी पूरी तरह गायब हो चुका है।

सबसे पहले जलकुंभी हटाना जरूरी

नगर पालिका द्वारा फिलहाल चीलर नदी की संपूर्ण सफाई के लिए डीपीआर (डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट) तैयार करवाने की बात कही जा रही है, जिसमें करोड़ों रुपये खर्च करने के दावे किए जा रहे हैं। हालांकि विशेषज्ञों और स्थानीय नागरिकों का मानना है कि जब तक नदी से जलकुंभी पूरी तरह नहीं हटाई जाएगी, तब तक कोई भी सफाई अभियान सफल नहीं हो सकता। सबसे पहले जलकुंभी हटाने की ठोस योजना बनाकर उस पर अमल किया जाना चाहिए, ताकि इसके बाद गंदगी की सफाई और नदी के पुनर्जीवन का रास्ता खुल सके।