4 नवंबर 2026,

बुधवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

डिजाइनर लहंगे-साडि़यों के सहारे सपनों की भरी उड़ान

मैं सही निर्णय लेने में यकीन नहीं करता बल्कि फैसले लेकर इन्हें सही साबित करने में यकीन करता हूं...
2 min read
Follow Patrika on Google News
Google source verification

शाजापुर

•

image

Gopal Swaroop Bajpai

•

Updated: 16 Dec 2017, 7:47 AM IST

patrika

मैं सही निर्णय लेने में यकीन नहीं करता बल्कि फैसले लेकर इन्हें सही साबित करने में यकीन करता हूं...

शाजापुर. मैं सही निर्णय लेने में यकीन नहीं करता बल्कि फैसले लेकर इन्हें सही साबित करने में यकीन करता हूं... रतन टाटा के इस कथन को चरितार्थ करने का हौसला शाजापुर के दो स्व. सहायता समूहों ने दिखाया है। शाजापुर निकाय के सखी एवं सरस्वती स्वयं सहायता समूह ने अपने निर्णय को सही साबित कर दिखाया है।
नगर पालिका शाजापुर अंतर्गत गरीब महिलाओं ने जब समूह बनाने का निर्णय लिया तो लोगों ने कहा कि आप सफल नहीं होंगे। पर जब इन गरीब महिलाओं ने दृढ़ शक्ति के साथ समूह बनाया और पंच सूत्रों का पालन कर उसे सही रूप से चलाया। इसके परिणाम सखी स्वयं सहायता समूह ने साडिय़ां एवं डिजायनिंग लहंगे एवं सरस्वती स्वयं सहायता समूह ने पापड़, बड़ी, चिप्स एवं आचार बनाने का व्यवसाय शुरू किया। व्यवसाय प्रारंभ होने के बाद इन सब ने न केवल अपनी गरीबी को हटाया, बल्की लोगों को भी सीख दी कि उनका समूह में जूडऩे का निर्णय सही था। आज दोनों समूहों के परिवार खुशहाल हैं।
उपरोक्त समूहों के कार्य को प्रोत्साहन देने के लिए नाबार्ड द्वारा नाबार्ड के स्थापना दिवस 12 जुलाई 2017 को सम्मानित किया गया। इन समूहों के गठन एवं संचालन में मदद करने के लिए निकाय से सिटी मिशन मैनेजर बीएस डामोर, सिटी मिशन मैनेजर संदीप राजपूत एवं सामूदायिक संगठक डी परमार को भी सम्मानित किया।
उपरोक्त समूहों के कार्य को प्रोत्साहन देने के लिए नाबार्ड द्वारा नाबार्ड के स्थापना दिवस 12 जुलाई 2017 को सम्मानित किया गया। इन समूहों के गठन एवं संचालन में मदद करने के लिए निकाय से सिटी मिशन मैनेजर बीएस डामोर, सिटी मिशन मैनेजर संदीप राजपूत एवं सामूदायिक संगठक डी परमार को भी सम्मानित किया। व्यवसाय प्रारंभ होने के बाद इन सब ने न केवल अपनी गरीबी को हटाया, बल्की लोगों को भी सीख दी कि उनका समूह में जूडऩे का निर्णय सही था। आज दोनों समूहों के परिवार खुशहाल हैं।