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विस चुनाव की पटरी में शुजालपुर से इंदरसिंह परमार को ग्रीन सिग्रल

भाजपा की दूसरी सूची जारी, 2013 में कालापीपल से विधायक चुने गए थे।

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शुजालपुर. कालापीपल के वर्तमान विधायक इंदरसिंह परमार को भाजपा संगठन ने शुजालपुर विधासभा क्षेत्र से प्रत्याशी बनाया है। परमार पहली बार विधानसभा चुनाव 2013 में कालापीपल से विधायक चुने गए थे। कालापीपल पर परमार ने कांग्रेस के कद्दावर नेता केदारसिंह मंडलोई को ९५७३ मतों से पराजित किया था। परमार मूलरूप से कालापीपल तहसील के ग्राम पोचानेर के निवासी होकर वर्तमान में शुजालपुर के श्रीनगर कॉलोनी में निवासरत हैं।
प्रोफेशन : परमार सामान्य किसान परिवार से हैं। विज्ञान से स्नातक करने के बाद एलएलबी की।
सोशल मीडिया : 3 साल से लगातार सोशल मीडिया पर सक्रिय रहते हुए आयोजनों को लाइव करते रहते हैं।
पहचान : स्पष्टवादिता एवं ईमानदार नेता के रूप में। वादों और फैसलों पर अडिग रहने वाले।
राजनीतिक अनुभव : बाल्यकाल से ही स्वयंसेवक होकर 1985 में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के बैनर तले राजनीति का सफर शुरू किया। शुजालपुर के जवाहरलाल नेहरू कॉलेज से छात्रनेता के रूप में राजनीति की शुरुआत की। 8 साल तक परिषद में पूर्णकालिक संगठन मंत्री रहे। भाजयुमो में प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य रहे। दो बार जिला भाजपा महामंत्री रहे। जनभागीदारी समिति अध्यक्ष शा. महाविद्यालय शुजालपुर के पद पर रहे।
कॅरियर का ग्राफ : पहला चुनाव कालापीपल विधानसभा से लड़ा और सफलता प्राप्त की। पांच वर्षों में विधानसभा क्षेत्र का विकास करते हुए कई बड़ी योजनाएं विधानसभा में पहुंचाईं। विवादों से नाता रहा, लेकिन कोई दाग नहीं लगे।
रिकार्ड : वर्ष 2013 के चुनाव में नए चेहरे के रूप में कालापीपल से चुनाव लड़े और पूर्व विधायक को ९ हजार से ज्यादा मतों से परजित किया।
लाइफ स्टाइल : मुख्य रूप से कुर्ता-पायजामा पहनावा।
ठिया : श्रीनगर कॉलोनी शुजालपुर मंडी
क्षेत्र की सबसे बड़ी समस्या : औद्योगिक इकाइयां वर्षभर नहीं चलना। लाचार प्रशासनिक व कानून व्यवस्था। रोजगार के लिए हजारों युवाओं का बड़े शहरों की ओर रुख करना। मेडिकल एवं इंजीनियरिंग क्षेत्र में शिक्षा का निम्न स्तर।
&भाजपा ने दूसरी बार परमार को सीट बदलकर उम्मीदवार बनाया है, लेकिन कांग्रेस ने अभी तक पत्ते नहीं खोले हैं। दोनों प्रमुख पार्टी के उम्मीदवार तय होने के बाद ही जनता अपना रुख तय करेगी। किसान, व्यापारी और बेरोजगारी की समस्या हल करने वाले जनप्रतिनिधि को ही वोट करूंगा।
अमीन खान, नौकरीपेशा

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