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सात साल पहले आया था बाघ, अब इस बड़ी बिल्ली ने दी दस्तक

तेंदुए की उपस्थिति से ग्रामीण दहशत में हैं। मौके पर पहुंची वन विभाग की टीम ने वहां सर्चिंग भी की है। साथ ही ग्रामीणों को भी सतर्क किया है।

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सात साल पहले आया था बाघ, अब इस बड़ी बिल्ली ने दी दस्तक

तेंदुए की उपस्थिति से ग्रामीण दहशत में हैं। मौके पर पहुंची वन विभाग की टीम ने वहां सर्चिंग भी की है। साथ ही ग्रामीणों को भी सतर्क किया है।

शाजापुर. वनविहीन जिले में सात साल पहल बाघ आया था अब तेंदुए ये यहां पर दस्तक दी है। इससे ग्रामीण दहशत में है। जिले के राजस्व विभाग के जंगली क्षेत्रों में कई बार जंगली जानवरों की आमद हो चुकी है। यहां पर बाघ से लेकर तेंदुए भी विचरण कर चुके हैं। अब एक बार फिर यहां पर जंगली जानवर की हलचल हुई है। वन विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर जांच की तो पता लगा ये तेंदुए के पगमार्क थे। तेंदुए की उपस्थिति से ग्रामीण दहशत में हैं। मौके पर पहुंची वन विभाग की टीम ने वहां सर्चिंग भी की है। साथ ही ग्रामीणों को भी सतर्क किया है।

जानकारी के अनुसार जिले के ग्राम सुंदरसी की कालीसिंध नदी के आसपास ग्रामीणों ने तेंदुआ देखने की जानकारी वन विभाग को दी थी। इस पर विभाग का अमला मौके पर पहुंचा। यहां ग्रामीणों ने उन्हें पैरों के निशान भी बताए। इसके बाद ग्रामीणों ने बताए स्थान पर वन विभाग के अमले ने सर्चिंग भी की। हालंकि उन्हें तेंदुआ तो दिखाई नहीं दिया, लेकिन उसके पगमार्क मिले हैं। इसके बाद वन विभाग के अमले ने ग्रामीणों को सतर्कता बरतने और रात में अकेले घर से बाहर न निकलने की भी अपील की है। यहां तेंदुए के होने की जानकारी मिलने के बाद वन विभाग के डीएफओ मयंक चांदीवाल, रेंजर पराग सेनानी के निर्देशन पर डिप्टी रेंजर अशोकसिंह बघेल, वनरक्षक कमलेश सोनी, रेस्क्यू एक्सपर्ट हरीश पटेल द्वारा सर्चिंग की जा रही है।

IMAGE CREDIT: patrika

7 साल पहले हाथियों पर बैठकर पकड़ा था बाघ

शाजापुर जिला वनविहीन होने के बाद भी 7 साल पहले जनवरी 2016 में बाघ को कालीसिंध नदी के किनारे वाली झाडिय़ों वाला क्षेत्र भा गया था। वैसे इस क्षेत्र में प्रति वर्ष शिकारी वन्य प्राणियों का मूवमेंट दिखाई देता है। वर्ष 2016 में वन विभाग की टीम ने आठ दिनों का रेस्क्यू कर एक बाघ भी पकड़ा था। कालीसिंध नदी क्षेत्र के बांगली गांव में जनवरी 2016 में बाघ को पहली बार देखा गया। यह खबर मिलते ही वन विभाग की टीम भी सकते में पड़ गई थी, क्योंकि यहां इसके 50 साल पहले तक कोई बाघ नहीं देखा गया था। 4 से लेकर 11 जनवरी 2016 तक सघन रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया। इसमें भोपाल की टीम के साथ दो हाथियों की मदद से बाघ को ट्रेंकुलाइज करके सुरक्षित पकड़ा था।